11 अगस्त को शुभ मुहूर्त में मनाए रक्षाबन्धन

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बदायूं।रक्षाबन्धन श्रावण मास की पूर्णिमा को प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है l इसी दिन भगवान हयग्रीव ने अवतार लिया था l एवं भगवान शिव के नटराज स्वरुप से संस्कृत के 14 सूत्रों की उत्पत्ति हुयी थी l जिनसे संस्कृत व्याकरण का निर्माण हुआ इसलिए इस पर्व को संस्कृत दिवस के रुप में भी मनाया जाता है l इस बार रक्षाबंधन पर बहुत भ्रम व संशय की स्थिती बनी हुयी है,कि कब रक्षाबन्धन मनाया जाए l इस वर्ष 11 अगस्त को श्रावण मास की पूर्णिमा प्रात: 10:39 मिनट पर प्रारम्भ होगी , जो कि अगले दिन प्रात: 7 :12 मिनट तक रहेगी l किन्तु पूर्णिमा के साथ ही विष्टि करण लग जाएगा, जिसे भद्रा कहा गया है l आचार्य सन्तोष कुमार शब्देन्दु ने बताया कि यह भद्रा रात्रि 8:50 मिनट तक रहेगी l धर्म सिंधु व निर्णय सिंधु के अनुसार भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा श्रावणी नृपतीं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी
भद्रा में श्रावणी (रक्षाबन्धन व उपाकर्म) करने से राजा को हानी होती है, तथा फाल्गुनी (होलिका दहन) करने से राज्य, ग्राम व परिवार को हानी होती है l इसलिए भद्रा समाप्ति पर अपराह्न या प्रदोष काल में इन कर्मों को करना चाहिए l
निर्णयामृत के वचनानुसार तत्सत्वे तु रात्रौ-अपि तदन्ते कुर्यात् इति निर्णयामृते।
भद्रा का अन्त यदि रात्रि में हो रहा हो तो रात्रि में ही रक्षाबंधन करना चाहिये। इस प्रकार रात्रि में रक्षाबंधन किया जा सकता है, इसमें कोई अवरोध नहीं है। रात्रि में अन्य भी व्रत पूजन किए जाते हैं, जैसे दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन, जन्माष्टमी पर रात्रि में कृष्ण पूजन, होलिका पर रात्रि साधना आदि अनेक उदाहरण है, अत: रात्रि में किसी प्रकार का दोष नही l

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पूर्णिमायां भद्रारहितायां त्रिमुहूर्ताधिकोदय व्यापिन्याम्- अपराह्णे प्रदोषे वा कार्यम् l उदय त्रिमुहूर्त न्यूनत्वे पूर्वेद्यु भद्रारहिते प्रदोषादिकाले वा कार्यम् यदि पूर्णिमा भद्रा रहित तीन मुहूर्त से अधिक हो तो उसी दिन रक्षाबन्धन अपराह्न या प्रदोष काल में करें, किन्तु 12 अगस्त को पूर्णिमा तीन मुहूर्त से कम है, इसलिए 12 अगस्त को रक्षाबन्धन न कर 11 अगस्त को प्रदोष काल में करना उचित है l

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इदं तु प्रतिपद्-युक्तायां न कार्यम् इति निर्णयामृते रक्षाबंधन प्रतिपदायुक्त पूर्णिमा में भी नहीं करना चाहिये यह सिद्धांत भी १२ अगस्त को रक्षाबंधन का बाधक है l
भद्रा रहित शुभ मुहूर्त 11 अगस्त प्रदोष काल 8:52 से 9:22 मिनट तक श्रेष्ठ मुहूर्त है l

अपरिहार्य कारण वश इस शुभ मुहूर्त में सम्भव न हो तो विष्टीरंगारकश्चैव व्यतीपातश्च वैधृति l प्रत्यरिजन्मनक्षत्रं मध्याह्नात्परत: शुभम् ll
इस सूत्र वचनानुसार मध्याह्न बाद भद्रा शुभ हो जाती है ,ऐसा मानकर
दोपहर 2 बजे के बाद तथा कार्येत्वावश्यके विष्टि: मुखमात्रं परित्यजेत् (मुहूर्त प्रकाश) वचनानुसार -भद्रा के मुख को छोड़कर पुच्छकाल सायं -5:18 से 6 :20 तक समय भी ग्राह्य है l किंतु इन समयों का उपयोग अत्यावश्यक परिस्थिति में करें l सम्भव हो तो उपरोक्त शुभ मुहूर्त में ही रक्षाबन्धन मनायें l रक्षासूत्र बांधने का मंत्र- येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल: l तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल ll

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