उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया पर्युषण पर्व का तीसरा दिन
बच्चों की हुई फैंसी ड्रेस और अंताक्षरी प्रतियोगिता
बिल्सी। नगर के मोहल्ला संख्या दो स्थित प्राचीन चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में मनाए जा रहे दस दिवसीय पर्युषण पर्व का तृतीय दिन यहां उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया। जहां सर्वप्रथम भगवान जिनेन्द्र का मंगल जलाभिषेक कर जैन समाज के लोगों ने तीर्थंकर भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की। प्रवचन दे रहे सतीश चंद्र जैन ने उत्तम आर्जव धर्म के बारे में बताते हुए कहा कि मन, वचन, कारय पूर्वक कुटिलता का त्याग करना ही आर्जव धर्म है। इस आर्जव धर्म के धारण करने से गलत कर्मों का नाश हो जाता है। आत्मा का स्वभाव ही सरल स्वभाव है। इसलिये प्रत्येक प्राणी को सरल स्वभाव रखना चाहिए। यह आत्मा अपने सरल स्वभाव से च्युत होकर पर स्वभाव में रमते हुए कुटिलता से युक्त ऐसे नरक, तिर्यंच, मनुष्य और देव इन चारों गतियों में भ्रमण करते हुए टेढ़ेपन को प्राप्त हुआ हैं।जब यह आत्मा मन, वचन, काय से सम्पूर्ण पर-वस्तु से विरक्त होकर अपने आप में रत होता है। तब यह जीवात्मा अपने सरल स्वभाव को प्राप्त होकर पर-वस्तु से भिन्न माना जाता है। तभी यह सुखी हो जाता है। इसी क्रम में यहाँ नीरेश जैन के सानिध्य में बच्चों की धार्मिक फैंसी ड्रेस एवं अंताक्षरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें निर्णायक मंडल द्वारा स्वस्ति जैन को नीलांजना के रूप के लिए प्रथम, दीपेश जैन को महावीर भगवान का रूप धारण कर द्वितीय एवं नमृत जैन को राजा श्रृंयांश का रूप के लिए तृतीय स्थान दिया गया । अंताक्षरी प्रतियोगिता में महावीर टीम के दिव्या जैन, सोनल जैन, काजल जैन को विजयी घोषित किया गया। इस मौके पर वीरांगना मंडल की अध्यक्ष डॉ आरती जैन, स्वीटी जैन, मोना जैन, इंदु जैन, प्रतिभा जैन, सीटू जैन, पूजा जैन, प्रीति जैन, अनिल जैन सोनी, प्रीत जैन, सुनील जैन, नीरज जैन, दीपक जैन, संतोष जैन, रीता जैन, सुमन जैन, रेखा जैन आदि मौजूद रही।













































































