हम उस देश के वासी हैं जहां हिन्दी बोली जाती है

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बिल्सी में आयोजित की गई काव्य गोष्ठी

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बिल्सी। हिन्दी सेवी पंचायत के तत्वावधान में मनाए जा रहे हिन्दी पखवाड़ा दिवस पर आज सोमवार को नगर के मोहल्ला संख्या निवासी युवा कवि एवं वरिष्ठ साहित्यकार विष्णु असावा के आवास पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजित की गई। जिसमें जिले के कई कवि एवं साहित्यकारों ने हिस्सा लेकर अपने काव्य के माध्यम से अपने विचारों को प्रस्तुत किया। यहां सबसे पहले वीणा वादिनी मां सरस्वती के मूर्ति पर सभी ने पुष्प अर्पित कर वंदना की। बदायूं से यहां पहुंचे सुनील शर्मा ने कहा-

हिन्दी भाषा मे बसैं हिंदुस्तां के प्रान।

आओ हिल मिल कर करें,हिन्दी का सम्मान।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विष्णु असावा ने कहा-

साल में चुना है एक दिन है विशाल हिन्दी। 

रोज ही मनायें जो ये दिवस मनाया है। 

शैलेन्द्र मिश्रा ने पढ़ा-

आखर आखर पूर्ण है, भाषा का विज्ञान। 

उस हिंदी में बसत हैं, जनमानस के प्राण।

बदायूं के ओजस्वी कवि षटवदन शंखधार ने कहा-

हम उस देश के वासी हैं जहां हिन्दी बोली जाती है

सूर, कबीरा, मीरा के छंदों की परिपाटी है

परौली के आकाश पाठक ने पढ़ा-

जम्मू दीपे था भारत में। तब से हिंदी है। 

जिसकी पहचान खुद एक बिंदी है। 

संपूर्ण विश्व घूमा फिर देखा,

दुनिया की सबसे प्रिय भाषा हां यह हिंदी है !!

हर्षवर्धन मिश्रा ने पढ़ा-

जनमानस की आन हुई है हिंदी से

भारत की पहचान हुई है हिंदी से

यूँ तो हर भाषा का आँचल हमें मिला

पर माटी ये धनवान हुई है हिंदी से

इस मौके पर कई साहित्यकार और युवा मौजूद रहे। 

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