समान नागरिक संहिता शरियत में मुदाखलत, इसलिए मुसलमानो को मंजूर नहीं, धरना प्रदर्शन कानून के दायरे में रहकर करें।
बरेली। भारत सरकार के ग्रह मंत्री अमित शाह जी के समान नागरिक संहिता पर दिए गए बयान को लेकर देश में एक बहस छिड़ गई है। वहीं मुस्लिम संगठनों ने देश व्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान भी किया है। इस पर आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने प्रेस को जारी किए गए बयान में कहा कि समान नागरिक संहिता कानून को लागू करने के लिए संविधान ने कुछ शर्तें रखी है, उसमें खास बात ये कही गई है, कि जिस राज्य में ये कानून लागू किया जाएगा, वहां रहने वाले हर समुदाय व हर सम्प्रदाय के व्यक्तियों की राए ली जाएगी। अगर सभी नागरिक Ucc कानून बनाने पर सहमत है, तो राज्य में कानून लागू किया जाएगा, अन्यथा नहीं।मौलाना ने कहा कि समान नागरिक संहिता का डराफ जिन जिन राज्यों में बनाया जा रहा है, वो सिर्फ एक ही राज्य का मौडल है। जबकि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग मुद्दे व मसाइल है, और अलग-अलग धर्मों के मानने वालों की जनसंख्या है। इसलिए एक राज्य का मौडल सभी राज्यों पर लागू नहीं किया जा सकता।मौलाना ने कहा कि एक कानून एक देश को भारत में लागू करने के लिए बड़ी समस्याओं से गुजरना पड़ेगा, बिल्कुल ऐसे ही समान नागरिक संहिता का कानून हैं। क्योंकि संविधान ने जाती , जन जाति और दूसरे कबीलों व आदिवासीयों को अलग-अलग सुहूलते उपलब्ध कराई है। Ucc को लागू करने में सबसे बड़ी समस्या नार्थ ईस्ट के राज्यों में आएगी, क्योंकि नागालैंड में नागा समुदाय, मिज़ोरम में मिज़ोरम समुदाय और दूसरे जन जाति समुदाय को Ucc के दायरे में नहीं लाया जा सकता। नार्थ ईस्ट राज्यों में इन समुदाय की नागरिए व देहात क्षेत्रो में अपने अलग-अलग कानून ढांचे सालों से स्थापित है, और इनको संविधान भी संरक्षण देता है। इसलिए इनसे छेड़छाड़ करना अच्छा नहीं होगा।मौलाना ने आगे कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के साथ ही सभी समुदाय को धार्मिक आजादी दी गई है। अगर समान नागरिक संहिता द्वारा धार्मिक आजादी को छीनने की कोशिश होगी, तो ये देश हित में नहीं होगा। भारत के 30 करोड़ मुसलमानो का मानना है कि Ucc शरियत में मुदाखलत करता हुआ कानून हैं, इसलिए इसको लागू न किया जाए, अगर लागू किया जाता है, तो इस पर अमल करने के लिए मुसलमानो को मजबूर न किया जाए। मौलाना ने तमाम मुस्लिम संगठनों से अपील करते हुए कहा कि जम्हूरी व्यवस्था में धरना प्रदर्शन करना हर व्यक्ति का अधिकार है। मगर इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि एहतजाज के दौरान भीड़ हिंसक ना हो , प्रदर्शन कारियों को ये बात खूब अवगत करा देना चाहिए कि एहतजाज अम्न व शांति के साथ में किया जाएं। किसी तरह भी उकदरभ न हो और हर काम कानून के दायरे में रहकर किया जाएं।
















































































