बरेली। आस्ताना आलिया मोहम्मदीया (दरगाह वली मियां) में हज़रत सय्यदना शेख़ अलाउद्दीन साबिर कलियरी रहमतुल्लाहि अलैहि के कुल शरीफ की रस्म अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। कार्यक्रम का आगाज़ कलाम-ए-पाक की तिलावत से हुआ। इस मौके पर अहमद हुसैन, फ़ारूक मदनापुरी और नवेद मोहम्मदी समेत अन्य नातख्वानों ने नात व मनकबत पेश कर हज़रत साबिर पाक की शान में अकीदत का नजराना पेश किया। चांद मस्जिद के इमाम हाफिज़ अफज़ाल ने अपने बयान में हज़रत साबिर पाक की सीरत और रूहानी जिंदगी पर रोशनी डालते हुए कहा कि उनका सब्र और जलाल पूरी दुनिया में मशहूर है। उन्होंने बताया कि हज़रत साबिर पाक का नसबी ताल्लुक सादात खानदान से था और बचपन से ही उनकी रूहानी करामातें जाहिर होने लगी थीं। अपने पीर-ओ-मुर्शिद हज़रत बाबा फरीद के हुक्म पर वह पिरान कलियर पहुंचे, जहां वर्षों तक गूलर के पेड़ के नीचे खड़े होकर इबादत की और इश्क-ए-इलाही में मग्न रहे। फ़ातिहा के बाद साबरिया चिश्तिया शिजरा पढ़ा गया तथा सलात व सलाम के बाद दरगाह के ख़लीफ़ा एवं सज्जादानशीं अल्हाज अनवर मियां हुज़ूर ने दुआ-ए-खैर कराई और मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। कार्यक्रम की निज़ामत कारी गुलाम यासीन ने की। इस अवसर पर सय्यद नाज़िर अली (चांद), शराफ़त, आरिफ़ उल्लाह, समीर, अब्दुल जब्बार, फ़िरासत, मोहम्मद आरिफ़, इलियास, रियासत, फ़ैज़ शम्सी, अफ़सर, इमरान, मोहसिन खान, ग़यास, वसी उल्लाह, इकबाल शम्सी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।