बरेली। हज़रत मख़दूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक (कलियरी) के 758वें उर्स के मुबारक मौके पर शहर की विभिन्न दरगाहों और मस्जिदों में कुल शरीफ की रस्म पूरी अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। जो अकीदतमंद किसी कारणवश कलियर शरीफ नहीं पहुंच सके, उन्होंने स्थानीय स्तर पर नज़्र-ओ-नियाज पेश कर बारगाह-ए-साबरी में खिराज-ए-अकीदत पेश किया। घेर शेख मिट्ठू स्थित दरगाह हज़रत सय्यद अमीन शाह भल्ले शाह मियाँ बाबा पर साबिर पाक का कुल शरीफ़ आयोजित हुआ। इस दौरान मुजाहिद बेग ने मुल्क में खुशहाली, अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे और कौम की तरक्की के लिए खुसूसी दुआ कराई। महफिल के बाद सज्जादा अब्दुल कय्यूम मियाँ ने सभी हज़रिने महफ़िल को तबर्रुक बांटा। इसी क्रम में नोमहला मस्जिद स्थित दरगाह नासिर मियाँ पर भी कुल शरीफ मनाया गया। इस मौके पर बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक एवं समाजसेवी पम्मी खां वारसी ने कहा कि हज़रत साबिर पाक की पूरी जिंदगी सब्र, इबादत और खिदमत-ए-खल्क (मानव सेवा) की मिसाल है। उन्होंने दुनिया को आपसी मोहब्बत और रूहानियत का पैगाम दिया। उनके बताए रास्ते पर चलकर ही समाज को बेहतर मुक़ाम हासिल होगा, सच्चा अकीदतमंद वही है जो बुजुर्गों की तालीमात को अमली जिंदगी में उतारे। अंत में सलातो-सलाम और फातिहा के बाद लंगर तकसीम किया गया। इस मौके पर मुख्य रूप से पम्मी ख़ाँ वारसी, हाजी रज़ी अनवर, ज़िया उर रहमान, फ़ाहद जीशान रुफी, मुजाहिद बेग, ज़फ़र अनवर, अमीर अहमद, रेहान, जुनैद, आशी, मेराज समेत अकीदतमंद मौजूद रहे।