बदायूँ। विद्या भारती विद्यालय शिव देवी सरस्वती शिशु मन्दिर में रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास एवं भारतीय संस्कृति की गरिमा के साथ धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती की वन्दना से हुआ। इस अवसर पर भैया-बहिनों एवं आचार्य-आचार्याओं ने रक्षाबंधन पर्व से जुड़े गीत, मल्हार एवं प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत कर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नरेश पाल जी ने रक्षाबंधन पर्व की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहिन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक है। उन्होंने राजा महाबली से जुड़ी ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए रक्षाबंधन पर्व की पृष्ठभूमि एवं उसके सांस्कृतिक महत्व को समझाया। विद्यालय के प्रधानाचार्य सुशील कुमार जी ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहिन के प्रेम का पर्व ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक पर्व भी है। यह बहिनों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा से जुड़ा हुआ है। भाई की कलाई पर बंधी राखी मात्र धागा नहीं, बल्कि भाई-बहिन के पवित्र रिश्ते को मजबूत करने वाला रक्षासूत्र है। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की बहिनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधकर उनके सुख, समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने भी बहिनों को मिष्ठान खिलाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्या प्रियंका सिंह ने आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि सरस्वती शिशु मन्दिर में रक्षाबंधन जैसे पर्वों का आयोजन भैया-बहिनों में भारतीय संस्कृति, संस्कार, पारस्परिक प्रेम एवं नैतिक मूल्यों के विकास का माध्यम है। कार्यक्रम का संचालन आचार्य अविलेश यादव ने किया। राष्ट्रीय गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के आचार्य लालाराम वर्मा, कौशल किशोर पाठक, राकेश मिश्रा, भोलेनाथ पाठक, सुबोध मिश्रा, राजीव कुमार सिंह, अनुराग मिश्र, राहुल शर्मा, निरंजन सिंह, देवेंद्र कुमार, आचार्याएँ सुमन शर्मा, पूजा शर्मा, ज्योत्सना सिंह, कंचन गुप्ता, अंचल पाठक, कु. आयुषी, रिया राजपूत सहित समस्त विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा।