नशामुक्त युवा ही राष्ट्र के स्वर्णिम भविष्य के निर्माता, सभी ने नशामुक्ति का संकल्प लिया
उझानी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र पर नशामुक्त भारत महाअभियान के अंतर्गत कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें युवाओं, आत्मीय परिजनों एवं मातृशक्तियों ने नशे से स्वयं दूर रहने और समाज को भी नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया। इस दौरान युवाओं ने “बीड़ी पीकर खांस रहा है, मौत के आगे नाच रहा है” जैसे नारे लगाकर नशे के खिलाफ जनजागरूकता का संदेश दिया।नरौरा सेवा केंद्र से आईं बहन पुष्पा ने कहा कि नशा मनुष्य की विवेक शक्ति और आत्मविश्वास को कमजोर कर उसे धीरे-धीरे परिवार और समाज से दूर कर देता है। नशे की आदत से घर की खुशियां उजड़ती हैं और बच्चों के भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आत्मबल, सकारात्मक सोच, अच्छे संस्कार और ईश्वर स्मरण को जीवन का आधार बनाकर नशे जैसी बुराई से बचा जा सकता है। उन्होंने युवाओं से अपने जीवन का लक्ष्य ऊंचा रखने और अपनी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में लगाने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि देवनरी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य राममोहन शर्मा ने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होते हैं। जिस देश का युवा स्वस्थ, शिक्षित, अनुशासित और चरित्रवान होता है, वह देश निरंतर प्रगति करता है। नशा युवाओं की प्रतिभा और संभावनाओं को नष्ट करने वाली सामाजिक बुराई है। माता-पिता बच्चों को केवल अच्छी शिक्षा ही न दें, बल्कि उन्हें पर्याप्त समय, संस्कार और सही दिशा भी दें।स्काउट संस्था के जिला ट्रेनिंग कमिश्नर एवं विशिष्ट अतिथि संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि युवा राष्ट्र की महाशक्ति हैं। नशे से मुक्त एक व्यक्ति केवल अपना जीवन नहीं बदलता, बल्कि पूरे परिवार और राष्ट्र की दिशा बदलने में योगदान देता है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूरी बनाकर अपनी ऊर्जा शिक्षा, खेल, योग, कौशल विकास, सेवा और राष्ट्र निर्माण में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशामुक्त युवा भारत की आशा, संस्कारित युवा भारत की शक्ति और संकल्पवान युवा भारत के स्वर्णिम भविष्य के निर्माता हैं।
कार्यक्रम में बहन मीरा ने अतिथियों को ओम शांति महामंत्र का पटका पहनाकर, प्रसादी एवं सद्वाक्यों का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। बहन रागनी और बहन अंजना ने तिलक लगाकर एवं पुष्पवर्षा कर अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर बहन अंजू, बहन अंबिका, घनश्याम सहित अनेक युवा, आत्मीय परिजन एवं मातृशक्तियां मौजूद रहीं।
















































































