बदायूँ में बीएसए कार्यालय का घेराव कर भाकियू चढ़ूनी ने सौंपा सात सूत्रीय ज्ञापन
बदायूं। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने शनिवार को मालवीय आवास गृह पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित कर जनपद की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, निजी विद्यालयों की मनमानी, बिना मान्यता संचालित स्कूलों तथा मिड-डे मील (एमडीएम) भुगतान से जुड़े मामलों को लेकर आवाज बुलंद की। पंचायत के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय का घेराव कर बीएसए एवं सिटी मजिस्ट्रेट को सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।
धरना स्थल पर आयोजित पंचायत को संबोधित करते हुए भाकियू चढ़ूनी के जिलाध्यक्ष सतीश साहू ने कहा कि जनपद में बड़ी संख्या में बिना मान्यता के विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिन पर प्रशासन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है। वहीं सरकारी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विद्यालयों में लगभग 100 बच्चों पर मात्र दो शिक्षक कार्यरत हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।कहा कि निजी विद्यालय अभिभावकों से हर वर्ष एडमिशन फीस, महंगी किताबें, कॉपियां, ड्रेस, ट्यूशन, बिल्डिंग शुल्क, बिजली, पंखा समेत विभिन्न मदों में मनमाने तरीके से धन वसूल रहे हैं। संगठन ने मांग की कि सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य की जाएं तथा एक ही प्रकार की पुस्तक व्यवस्था लागू की जाए, ताकि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम हो सके।धरने में अमरोहा से पहुंचे भाकियू चढ़ूनी के जिलाध्यक्ष भी अपने समर्थकों के साथ शामिल हुए और बीएसए कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान संगठन ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार के विरोध में सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।इस मौके पर इस्लामनगर ब्लॉक के एक सहायक अध्यापक लोकेश कुमार ने भी अपनी शिकायत संगठन के माध्यम से अधिकारियों के समक्ष रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने 1 अप्रैल 2024 से 31 जनवरी 2026 तक बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं खंड शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर विद्यालय में मिड-डे मील का संचालन कराया, लेकिन लगभग ₹4.88 लाख की एमडीएम लागत राशि आज तक प्राप्त नहीं हुई।शिकायत के अनुसार, उन्होंने एमडीएम संचालन के लिए अपनी वेतन राशि, गोल्ड लोन तथा उधार लेकर गैस, फल एवं अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की, जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ आ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान द्वारा सहयोग नहीं किए जाने के बावजूद कथित रूप से ₹2 लाख का चेक जारी कर दिया गया, जबकि एमडीएम संचालन का कार्य उन्होंने स्वयं कराया था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर बकाया भुगतान कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की।
शिकायत में यह भी कहा गया कि यदि किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित ग्राम प्रधान एवं अन्य नामजद लोगों की होगी। संगठन ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों की शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण किया जाए।
धरना-प्रदर्शन एवं ज्ञापन कार्यक्रम में यारवेंद्र यादव, अमनदीप, सोनू यादव, विवेक कुमार, अंकुर सिद्धू, पीतम सिंह, अरशद खान, इरशाद खान, अनावर, शराफत खान, महेंद्र पाल, नूरुद्दीन, सर्वेश, शरीफ अब्बासी, भगवानदास सहित बड़ी संख्या में किसान एवं संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।















































































