बिल्सी में आर्य संस्कार शाला गुरुकुल की सात दिवसीय प्रतियोगिताओं का शुभारंभ हुआ, बच्चों ने दिखाया उत्साह
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी ग्राम स्थित आर्य संस्कार शाला गुरुकुल में बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं उनकी प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से आयोजित सात दिवसीय प्रतियोगिताओं का सोमवार को उत्साहपूर्ण शुभारंभ हुआ। पहले दिन अभिनय एवं नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें तीन वर्ष से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।प्रतियोगिता के दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपने आकर्षक अभिनय और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों से उपस्थित अभिभावकों एवं दर्शकों का मन मोह लिया। बच्चों की शानदार प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और मंच मिलने पर बाल प्रतिभाएं अपनी क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।एकल अभिनय प्रतियोगिता में कुमारी भावना आर्य ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कुमारी आस्था आर्य द्वितीय स्थान पर रहीं, जबकि कुमारी उर्वशी एवं कुमारी अनन्या ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान हासिल किया।
वहीं युगल नृत्य प्रतियोगिता में कुमारी अनन्या आर्य एवं कुमारी भावना आर्य की जोड़ी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। द्वितीय स्थान कुमारी आस्था एवं कुमारी भावना की टीम को मिला, जबकि तृतीय स्थान कुमारी बिंदु एवं उनकी सहयोगी प्रतिभागी ने प्राप्त किया।
प्रतियोगिता की निर्णायक आचार्या तृप्ति आर्य ने कहा कि बचपन में अभिनय और नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने से बच्चों में आत्मविश्वास विकसित होता है, मंच पर बोलने का साहस बढ़ता है तथा व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि “जो भाव और शब्दों के अनुरूप अंगों का संचालन करता है, वही वास्तविक नृत्य है। फूहड़ता का नाम नृत्य नहीं है।”
गुरुकुल के निर्देशक आचार्य संजीव रूप ने कहा कि प्रतियोगिताएं बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और सर्वांगीण विकास का श्रेष्ठ साधन हैं। ऐसी प्रतियोगिताओं से बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिताओं के दूसरे दिन वैदिक मंत्रोच्चार प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें बच्चों को वैदिक मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करना होगा। जिन प्रतिभागियों का उच्चारण जितना अधिक शुद्ध एवं प्रभावशाली होगा, उन्हें उसी के अनुरूप श्रेष्ठ स्थान प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुरुकुल का उद्देश्य बच्चों में भारतीय संस्कृति, संस्कार और वैदिक परंपराओं के प्रति सम्मान एवं जागरूकता विकसित करना है।















































































