प्रसिद्ध कवि ‘डॉक्टर कुंअर बेचैन’ की जयंती पर सजी देश-दुनिया के नामचीन कवियों की भव्य महफिल
गाजियाबाद। प्रसिद्ध कवि डॉक्टर कुंअर बेचैन की 84वीं जयंती पर 08 जुलाई 2026 की सांय दूधेश्वर नाथ मंदिर में शानदार कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। पूरे दिन भर निरंतर भारी बरसात होने के बावजूद भी कवि सम्मेलन में पहुंचे भारी संख्या में काव्य प्रेमियों ने पांच घंटे से भी अधिक समय तक कविता, गीत व गजलों का पूरा आनंद लिया।’डॉक्टर कुँअर बेचैन स्मृति न्यास ऑस्ट्रेलिया’ और साहित्यिक संस्था ‘काव्य कोना’ की तरफ से दूधेश्वर नाथ मंदिर के नवनिर्मित सभागार में आयोजित किये गये इस शानदार सफल कवि सम्मेलन की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कवि पदमश्री डॉक्टर अशोक चक्रधर ने की। इस अवसर पर उन्होंने डॉक्टर कुँअर बेचैन से जुड़े कई संस्मरण सुनाए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर कुँअर बेचैन ने एक से बढकर एक अच्छे गीत व बहुत सी शानदार गजलें भी लिखीं। उन्होंने कहा कि पॉजिटिविटी डॉक्टर कुँअर बेचैन का बहुत बड़ा गुण था, जिसे हम सभी रचनाकारों को जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित गाजियाबाद शहर के विधायक संजीव शर्मा ने कहा कि डॉक्टर कुँअर बेचैन के कारण साहित्यिक क्षेत्र में गाजियाबाद का नाम पूरी दुनिया में मशहूर हुआ।वहीं जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं विश्व प्रसिद्ध दूधेश्वर नाथ मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरी महाराज ने कहा कि साहित्यिक गतिविधियां किसी भी शहर के लिए प्राण वायु का काम करती हैं। श्रीमहंत नारायण गिरी महाराज ने आयोजन के लिए डॉक्टर कुँअर बेचैन के पुत्र प्रगीत कुँअर और पुत्रवधू डॉक्टर भावना कुँअर को भी आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में रहने के बावजूद वो
अपने पिता की गृह नगरी में उनकी स्मृतियों को संजोकर बनाए रखने का महान कार्य कर रहे हैं।कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रसिद्ध शायर राज कौशिक ने कहा कि डाक्टर कुँअर बेचैन के पुत्र प्रगीत कुँअर और पुत्रवधू डॉक्टर भावना कुँअर के योगदान से ये आयोजन संभव हुआ है। वो ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका और डॉक्टर कुँअर बेचैन स्मृति न्यास ऑस्ट्रेलिया के माध्यम से कार्यक्रम में परोक्ष रूप से उपस्थित हैं। इस कार्यक्रम में प्रगीत कुँअर के मित्र व जेडी ज्वैलर्स के स्वामी पंकज जिंदल का भी बहुत सहयोग कार्यक्रम को मिला।इसके बाद काव्य रस की धारा की शुरूआत दिल्ली से पधारे शायर कर्नल संजय चतुवेर्दी ने जब इन शेरों के साथ की तो लोगों ने खूब तालियां बजाई। नयी नस्लों को जीने के नये नुस्खे सिखाता हूँ
जहाँ बारिश नहीं होती वहीं पौधे लगाता हूँ
विश्व विख्यात शायर विजेंद्र सिंह परवाज के एक-एक शेर पर लोगों ने देर तक तालियां बजाकर दाद दी। उनका ये मशहूर शेर देखिए-
जब अमीरी में मुझे गुरबत के दिन याद आ गए
कार में बैठा हुआ पैदल सफर करता रहा
श्रोताओं ने विजेंद्र सिंह परवाज से फरमाइश करके ये गजल सुनी-
दोपहर तक बिक गया बाजार का एक एक झूठ
शाम तक बैठे रहे हम अपनी सच्चाई लिए
शायर राज कौशिक के इन अशआर पर लोगों ने खूब तालियां बजाई-
सो बहाने हैं जहां पर तो रुलाने के लिए इक बहाना ढूंढ लो हंसने हंसाने के लिए
शौहरतों की ख्वाहिशों का ये तमाशा खूब है लोग पंजों पर खड़े हैं कद बढ़ाने के लिए
पुणे से आए प्रसिद्ध शायर राजेश त्रिपाठी को इस गजल पर खूब दाद मिली-
कई रातों से दस्तक दे रही है चाँदनी मुझको
मैं रखके चाँद की सलवट बगल में सो
नहीं सकता
यकीं कर लेता हूँ उसपे, गुमाँ जब जब भी होता है
मुझे वो अपना कहता है जो अपना हो नहीं सकता
डॉ तारा गुप्ता की ये पंक्तियाँ बहुत सराही गई-
जाने क्या खासियत रही मुझ में ढूंढती जिसको जिंदगी मुझमें
गजरौला से पधारी डॉ मधु चतुवेर्दी ने जीवन का सत्य इन शब्दों में सुनाया-
चाहा था हमने जैसा, न वैसा कभी हुआ पर ज़िन्दगी में जो हुआ, बिल्कुल सही हुआ
कवयित्री डॉक्टर तूलिका सेठ की रिश्तों पर पढ़ी रचना लोगों ने बहुत सराही –
हमें बाबा ने समझाया बहुत है बुजुर्गों का रहे साया बहुत है
सकूँ पाता है पुरा गाँव आकर
पुराना पेड़ है छाया बहुत है
नोएडा से आए डॉक्टर कुंअर बेचैन के भतीजे युवा कवि प्रतीक सक्सेना का ये अंदाज लोगों को बहुत पसंद आया-
मैं अब अपनी धुन में ही रहने लगा हूँ मैं खुद से ही कहने ओ सुनने लगा हूँ उठाऊँगा कब तक तुम्हारा ये बोझा गमों मुझको बख़्शो, मैं थकने लगा हूँ
कवयित्री डॉ वीणा मित्तल की ये रचना खूब सराही गई-
कहीं खो गयीं दादी दादी नानी की नसीहत,
मां-बाप का साया सर से उठा तो ये जाना मैंने,
जैसे घर की दीवारों पे छत न रही।
मेरठ से पधारी कवयित्री कोमल रस्तोगी ने भगवान विष्णु पर लिखा गीत सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। कवयित्री शैलजा सक्सेना और नेहा वैद्य ने भी शानदार काव्य पाठ किया। रचना वार्ष्णेय ने डॉक्टर बेचैन का प्रसिद्ध गीत –
‘बदरी बाबुल के अँगना जइयो’ गीत गाकर सुनाया।
कार्यक्रम के स्वागत अध्यक्ष समाजसेवी राम अवतार जिंदल ने सभी रचनाकारों का स्वागत किया।
श्रीमहंत नारायण गिरी महाराज ने भगवान दूधेश्वर नाथ का चित्र देकर और दुपट्टा पहना कर रचनाकारों का अभिनंदन किया। विशेष अतिथियों के रूप में वरिष्ठ भाजपा नेता पृथ्वी सिंह कसाना, चीफ वार्डन ललित जायसवाल, विशाल कौशिक, जय भगवान गर्ग, राकेश गुप्ता, विजय मित्तल, तरुण गोयल (गांधर्व संगीत महाविद्यालय) सत्येन्द्र आत्रे, डॉक्टर पुष्पा जोशी, डॉक्टर सुरभि सक्सेना व अशोक गोयल उपस्थित रहे।















































































