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Uttar Pradesh

भागवत कथा भव रोग की औषधि, प्रभु से मिलाती है: पं. सुरेश शास्त्री

July 10, 2026By admin0 comments
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बरेली। प्राचीन एवं भव्य बाबा त्रिवटी नाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन धाम से पधारे भागवताचार्य पंडित सुरेश शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ही भव रोग की औषधि है और यही मनुष्य को भगवान से मिलाने का माध्यम बनती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भगवान की कथा का आश्रय नहीं लेता, वह व्यथा का आश्रित हो जाता है।
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि संसार परिवर्तनशील है और यहां प्रत्येक व्यक्ति व वस्तु एक दिन नष्ट हो जाती है, लेकिन मनुष्य की तृष्णा कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने कहा कि आवश्यकता और तृष्णा में अंतर समझना चाहिए तथा भगवान श्रीकृष्ण का आश्रय ही तृष्णा का अंत कर सकता है।
भागवताचार्य ने भक्त ध्रुव की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि माता ही संतान की प्रथम गुरु होती है। माता सुनीति के संस्कारों से प्रेरित होकर बालक ध्रुव ने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की, जिसके फलस्वरूप उन्हें ध्रुव तारे के रूप में अमर स्थान प्राप्त हुआ।
उन्होंने भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाते हुए कहा कि अटूट श्रद्धा और विश्वास के कारण भगवान नरसिंह ने प्रकट होकर भक्त की रक्षा की और हिरण्यकशिपु का वध किया। भगवान अपने भक्तों के प्रति सदैव करुणामय रहते हैं।
पंडित सुरेश शास्त्री ने कहा कि जीवन का सार अभाव में भी प्रसन्न रहना और हर परिस्थिति को स्वीकार करते हुए सत्कर्मों में जीवन लगाना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन को बोझ नहीं, बल्कि ईश्वर का उत्सव मानकर जीने का संदेश दिया।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत जी की आरती की तथा प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में मंदिर सेवा समिति के प्रताप चंद्र सेठ, मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल एवं सुभाष मेहरा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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