पुरानी जिला जेल में 10 वर्ष बाद फिर होगी जून अंत या जुलाई में चहल पहल

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बरेली । कलेक्ट्रेट के निकट एवं पोस्टमार्टम हाउस के पीछे स्थित 68.15 एकड़ में फैली पुरानी जिला जेल में इसी माह जून 2026 के अंत या जुलाई में 10 वर्ष बाद फिर से चहल पहल एवं रौनक बढ़ सकती है। लगभग 186.24 करोड़ की लागत से इस जिला जेल में जीर्णोद्धार एवं सुरक्षा तंत्र/सी सी टी वी कैमरे आदि लग चुके हैं। इस जेल के नए बने भवन में बैरक की क्षमता बढ़ जाने से अब 2575 से अधिक विचाराधीन कैदी यहां रह सकेंगे। जिला जेल में आधुनिक पाक शाला का काम लगभग पूरा हो गया है। अब पूरे परिसर एवं कार्यालय में सुरक्षा उपकरण सी सी टी वी कैमरे लगाने, कंप्यूटर, फर्नीचर, आंतरिक साज सज्जा, आधुनिक रसोईघर का काम अंतिम चरण में है। इसी जून माह/ जुलाई में विचाराधीन कैदी की शिफ्टिंग होने की भी उम्मीद है । जिला जेल को 172 करोड़ की राशि से लोनिवि ने जीर्णोद्धार कर इस जिला जेल में 2 हजार 575 बंदियों की क्षमता के लिए कुछ नए बैरक तैयार कराए हैं। अब सुरक्षा उपकरण/कैमरे लगाने के लिए भी 14.24 करोड़ रूपये का बाद में भी बजट मिल चुका है जिस का काम भी हो चुका है। अब वर्षों पुरानी जिला जेल को उसके गृह विभाग को हैंडओवर करने की भी प्रक्रिया इसी माह होनी है। इसके बाद केसरपुर स्थित सेंट्रल जेल-2 में रह रहे विचाराधीन बंदियों को यहां तैयार हुई जिला जेल में स्थानांतरित कर कैदियों का आना भी शुरू हो जाएगा।
स्मरण रहे बरेली में कचहरी के पास स्थित पुरानी जिला जेल के बंदियों को कुछ वर्ष पूर्व केसरपुर में बनी नई जेल में भेजा गया था। पहले खाली हुई जिला जेल की भूमि पर हाई कोर्ट की बेंच खोलने, जिला अदालत, इंडस्ट्रियल हब, आईटी पार्क आदि बनाने का प्रस्ताव था। यह प्रस्ताव परवान नहीं चढ़े। आखिर 68.15 एकड़ भूमि वाली जेल को फिर से 172 करोड़ से जीर्णोद्धार का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। लोक निर्माण विभाग को इसकी जिम्मेदारी दी गई। 68.15 एकड़ जमीन में बनी इस जेल के लिये 148 करोड़ का टेंडर हुआ था जो बढ़ कर 172 करोड़ पर जा पहुंचा है। बाद में 14.24 करोड रुपए सुरक्षा तंत्र मजबूती के लिए मिले। जिला जेल में पहले इस जेल की क्षमता 1185 बंदियों की थी। अब नवीन निर्माण के बाद इसकी क्षमता बढ़कर 2575 होनी बताई गई है। अब हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद केसरपुर जेल से विचाराधीन बंदी कचहरी जेल पर यहां जाएंगे। जेल अधीक्षक आलोक शुक्ला ने निर्भय सक्सेना को फोन पर बताया कि जेल में जेलर सुशील कुमार एवं आनंद जी के साथ ही शासन से लगभग 100 स्टाफ की नियुक्ति/तैनाती भी हो चुकी है । जून माह या जुलाई 2026 में यहां फिर से चहल पहल शुरू हो जाएगी। उच्च सुरक्षा बैरक में 12 खूंखार बंदियों को रखने की भी बैरक बनी हुई है । महिला जेल की क्षमता 60 बंदियों को रखने की है । चार जेल वाला बरेली यूपी का पहला जिला = जिले में दो केन्द्रीय कारागार, एक जिला जेल और एक किशोर सदन है। स्मरण करा दें कि उत्तर प्रदेश में बरेली ही ऐसा एकमात्र जिला बन गया है जिसमें एक नहीं चार- चार जेल हैं। जिले में इज्जतनगर में केन्द्रीय कारागार एवं किशोर सदन था, दूसरा भूता में केन्द्रीय कारागार टू, है । सिविल लाइन में पुराना जिला कारागार भी जीर्णोद्धार के बाद अब नए रूप में शुरु होना है।
अंग्रेज शासन काल में वर्ष 1841 में कलेक्ट्रेट के पास यह जिला जेल बनी थी। वह अब 185 वर्ष पुरानी हो चुकी है। उस समय जेल में 213 बंदियों की क्षमता थी जो अब जीर्णोद्धार के बाद वर्ष 2026 में बढ़ कर 2575 हो जाएगी। ज्यूडीशियल लॉक अप के तौर पर जेल में बन्द किया जाता था। पुराने समय में जिला जेल में अनेक स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी और क्रांतिकारी बन्द रहे थे। अंग्रेजों की नाक में दम करने वाले रुहेला सरदार खान बहादुर खान को जिला जेल में ही फांसी की सजा दी गयी थी। उनके शव को जिला जेल में ही दफन कर दिया गया था। आज भी उनकी जेल परिसर के पास में मजार मौजूद हैं। जब वर्ष 2010 में इस जिला जेल को कंडम घोषित किया गया था। इसके साथ ही अंग्रेजों के जमाने में बनी ऐतिहासिक जिला जेल इतिहास के पत्रों में दर्ज हो गई थी। अब एक बार फिर इसी कंडम हुई जिला जेल का जिला प्रशासन ने फिर से 172 करोड़ रुपए से जीर्णोद्धार कराकर नई जिला जेल तैयार कर दी मुख्यालय से अनुमति मिलने के बाद जेल जल्द जल्द ही शुरू होने की तैयारी चल रही है। नई बनी जिला जेल पूरी तरह से हाईटेक जेल बनाई गई है। जेल में पुरुष, महिला और किशोर बंदियों के लिए अलग- अलग बैरक बनाई गई है। इसके साथ ही आउट डोर और इंडोर गेम के लिए एक छोटा स्टेडियम के साथ ही स्कूल और बन्दियों की पेशी के लिए वीडियो कांफ्रेंसिग रूम भी बनाया गया है। खूंखार बंदियों के लिए हाई सिक्योरिटी बैरक का भी निर्माण कराया गया है। जिला जेल में अब विराचाधीन बंदियों को रखा जाएगा। नई बनी जिला जेल के लिए जेल अधीक्षक और दो जेलरों की तैनाती पूर्व में ही हो चुकी है। अब जेल शिफ्ट होने के बाद वह अपनी तैनाती स्थल नए जिला कारागार भवन में आ जाऐंगे।
बता दें कि 2010 में पुरानी जिला जेल में को कंडम घोषित करने के बाद भुता एरिया 90 एकड़ भूमि में 230 करोड़ की लागत से नई बनी जेल में 100 से ज्यादा बैरक का निर्माण कराया ग़या था। जिसे केन्द्रीय कारागार टू जेल का दर्जा दिया गया था। उसमें 3358 बन्दियों की रखने की क्षमता है। इस केन्द्रीय कारागार टू में पुरुष, महिला और किशोर बंदियों के लिए अलग- अलग जेल बनाई गई थी। साथ ही आउट डोर और इंडोर गेम के लिए स्टेडियम के साथ ही स्कूल और बन्दियों की पेशी के लिए वीडियो कांफंसिग रूम भी बने है। केन्द्रीय कारागार टू में खूंखार बंदियों के लिए दो हाई सिक्योरिटी बैरक का भी निर्माण इसमें कराया गया था। केन्द्रीय कारागार टू में 80 बेड का अस्पताल भी है। जब वर्ष 2016 दिसंबर में 68.15 एकड़ में फैली पुरानी जिला जेल से सभी बंदिया को भुता स्थित जेल में शिफ्ट किया गया था। तब लगभग चार वर्ष पूर्व भुता स्थित जिला कारागार को केन्द्रीय कारागार टू बना दिया गया था।
इसी के साथ बरेली यूपी का पहला चार जेलों वाला जिला भी बन गया है। बरेली जिले में इन जेल में बरेली के साथ ही बदायू, रामपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर व देवबंद, शाहजहांपुर, पीलीभीत, मुरादाबाद आदि के बंदी रहते है।
बता दें कि करीब वर्ष पहले शासन ने जिला जेल के लिए जेल अधीक्षक आलोक शुक्ला, जेलर आनंद कुमार और सुशील कुमार वर्मा की तैनाती भी कर दी थी । दोनों जेलर भुता वाली जेल में ड्यूटी कर रहे थे।
सीतापुर जेल के बंदी और कैदी रखे सजायाफ्ता महिला कैदी लखनऊ जाऐगें। जबकि बरेली की की नारी निकेतन भेजी जाएंगी।
सपा सरकार में 68.15 एकड़ में फैली पुरानी जिला जेल से खाली हुई जमीन पर भव्य लोहिया पार्क बनना प्रस्तावित हुआ था। इसके साथ ही जिला जेल की जमीन पर दो बिजली घर बनना थे। जिसमें से एक बिजली घर बन भी चुका है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद लेोहिया पार्क का प्रस्ताव रद्द हो गया था। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के बाद पुरानी जिला जेल को जीर्णोद्धार कर उस में नई बैरक भी बना दी गई है।
नई जिला जेल बनने के बाद अब दोनों सेंट्रल जेल में सिर्फ सजायाफ्ता कैदी ही रखे जाएँगे। इज्जतनगर स्थित सेंट्रल जेल में बदायूं, रामपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर व दैवबंद जेल के सजायाफ्ता कैदी रहेंगे। इसके अलावा भुता स्थित सेंट्रल जेल टू में शाहजहांपुर, पीलीभीत, मुरादाबाद व सीतापुर जेल के दोषसिद्ध कैदी रहेंगे। बरेली की सजायाफ्ता महिला कैदियों को लखनऊ के नारी निकेतन में रखा जाएगा। बरेली के इज्जत नगर में सेंट्रल जेल का निर्माण वर्ष 1848 में किया गया था। उस समय जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी लंबी अवधि के लिए दोषी ठहराए गए लोगों को रखने के लिए केंद्रीय जेलों के निर्माण की नीति शुरू कर रहे थे। इस केंद्रीय जेल में स्वर्गीय पंडित जवाहर लाल नेहरू, संजय गांधी, क्रांतिकारी प्रताप बारहठ,थे। अब पूर्वांचल के डॉन रहे बबलू श्रीवास्तव भी इस जेल में निरुद्ध हैं। निर्भय सक्सेना

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