यूपी में पोस्टर वॉर तेज: बदायूं में सपा कार्यकर्ताओं ने फाड़े होर्डिंग, भाजपा पर साजिश का आरोप

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बदायूं। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गरमाने लगा है। प्रदेश में पोस्टर वॉर की शुरुआत के बाद बदायूं में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराते हुए लगाए गए सभी विवादित होर्डिंग फाड़ दिए। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने गिरते जनाधार से परेशान होकर इस तरह की राजनीतिक साजिशें कर रही है और विपक्षी दलों को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला पंचायत सदस्य अशोक यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार में महिला अपराध लगातार बढ़े हैं। उन्होंने हाथरस कांड और उन्नाव प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सरकार की कार्यशैली सवालों के घेरे में रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती कीमतों से जनता परेशान है, लेकिन सरकार मूल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के राजनीतिक हथकंडे अपना रही है।

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अशोक यादव ने कहा कि 2024 के चुनाव में जनता ने एकजुट होकर बड़ा संदेश दिया था और अब 2027 में समाजवादी पार्टी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। इसी कारण भाजपा घबराई हुई है। उन्होंने कहा कि डीजल, पेट्रोल और गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और जनता महंगाई की मार झेल रही है।सपा नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि जिन होर्डिंगों को लगाया गया, उन पर किसी संगठन या व्यक्ति का नाम तक दर्ज नहीं है। उनका आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई सुनियोजित तरीके से समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की छवि खराब करने के उद्देश्य से की गई है।दरअसल प्रदेश के कई शहरों— बदायूं, नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, हरदोई, कानपुर, शाहजहांपुर, कन्नौज, उन्नाव और कानपुर देहात में एक जैसे पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में 2014 के चर्चित बदायूं कांड का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा गया है। पोस्टरों में लिखा गया— “महिला विरोधी सपाई, बेटियों की चीखें, गुंडों का शोर, सपा राज में यही था दौर।”पोस्टर में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ एक बच्ची की तस्वीर भी लगाई गई थी, जिसके बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया। जैसे ही इन पोस्टरों की जानकारी समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं को हुई, उन्होंने विरोध शुरू कर दिया और कई स्थानों पर होर्डिंग हटाने तथा फाड़ने की कार्रवाई की।अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में पोस्टर वॉर ने नया मोड़ ले लिया है। 2027 के चुनाव से पहले आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक हमलों का दौर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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