गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र पर युग निर्माण अभियान को लेकर भव्य संगोष्ठी हुई
बदायूं। आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्र जागरण और युग परिवर्तन के दिव्य संकल्पों से सराबोर वातावरण उस समय भक्तिमय हो उठा, जब गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र पर शांतिकुंज हरिद्वार के आगामी आयोजनों एवं युग निर्माण अभियान को लेकर भव्य संगोष्ठी हुई। श्रीराम साधना आरण्यक नैमिषारण्य तीर्थ से पधारे आत्मीय परिजनों ने युवाओं के भीतर सेवा, साधना और समर्पण की अलख जगाई। गायत्री परिजनों ने बड़ी संख्या में समयदान और अंशदान के संकल्प पत्र भरकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का प्रण लिया।श्रीराम साधना आरण्यक नैमिषारण्य तीर्थ के व्यवस्थापक देशबंधु तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन संस्कारों से सींचें, समाज और मानवता के लिए उपयोगी बनाएं। समयदान और अंशदान वह दिव्य साधना है, जो व्यक्ति को महान बनाती है और समाज को नई दिशा देती है। उन्होंने युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के तप और त्याग का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि नैमिषारण्य की पुण्यभूमि पर आचार्यश्री ने तीन वर्षों तक कठोर तप किया। उनका जीवन त्याग, तपस्या और लोकमंगल की अद्भुत मिसाल है। नजीबाबाद जोन के जोन समन्वयक अशोक सिंह ने कहा कि युवाओं में असीम शक्ति होती है। उनके शब्दकोष में असंभव जैसा कोई शब्द नहीं होता। यदि युवा जाग जाएं तो समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव है। युवाओं का समर्पण और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगा।पूर्व ट्रस्टी सुधाकर ने कहा कि नैमिषारण्य की पावन धरती पर बन रहा श्रीराम साधना आरण्यक आने वाले समय में आध्यात्मिक चेतना का विराट केंद्र बनेगा। यह स्थान युवाओं को संस्कार, सेवा और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देगा। युवा शक्ति जिस समर्पण के साथ इस अभियान से जुड़ रही है, वह भविष्य के उज्ज्वल भारत का संकेत है।सह व्यवस्थापक डा. विनोद कुमार ने कहा कि जो व्यक्ति श्रेष्ठ कार्यों के लिए समय निकालता है, उसका जीवन स्वयं श्रेष्ठ बन जाता है। समाज के उत्थान के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन का कुछ समय सेवा और संस्कार निर्माण में लगाना चाहिए। उप जोन समन्वयक अजयवीर सिंह यादव ने कहा कि गुरु व्यक्ति नहीं, शक्ति है, दिव्य चेतना का प्रकाश है, जो मनुष्य को सही मार्ग दिखाता है। गुरु की प्रेरणा से ही जीवन में आत्मविश्वास, संस्कार और सकारात्मकता का संचार होता है। गुरु मार्ग पर चलकर ही मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है।जिला समन्वयक नरेंद्र पाल शर्मा ने कहा कि नैमिषारण्य में तैयार हो रहा श्रीराम साधना आरण्य युवाओं की जिज्ञासाओं, प्रश्नों और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि समयदान और अंशदान के माध्यम से हर व्यक्ति इस महान अभियान का सहभागी बन सकता है। समाज में परिवर्तन संगठित प्रयासों से ही संभव है और गायत्री परिवार इसी दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। इस मौक पर परिव्राजक सुमित कुकरेती, सुमन कुकरेती, पूरन देवी, महेश शाक्य आदि मौजूद रहे। संचालन मुख्य प्रबंध ट्रस्टी सुरेंद्र नाथ शर्मा ने किया।















































































