बरेली। आस्ताना ए आलिया मौहम्मदिया (दरगाह वली मियां) में पीर-ए-तरीकत कुतुबुलअक़ताब क़िबला अल्हाज मौलाना शाह वली मोहम्मद रहमतुल्लाह अलैह के पीरो-मुर्शिद मौलवी सय्यद अब्दुल क़दीर मियां रहमतुल्लाह अलैह का एक रोज़ा कुल शरीफ़ अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। सुबह से ही ज़ायरीन के आने का सिलसिला जारी रहा। ज़ायरीन के लिए रात भर खानकाह के लंगरखाने में लंगर तैयार किया गया। खास बात यह रही कि लंगर बाहर के रसोइयों द्वारा नहीं, बल्कि खानकाह के खादिमों और महिलाओं ने मिलकर तैयार किया।कार्यक्रम का आगाज़ कलाम-ए-पाक की तिलावत से हुआ। सय्यद मुस्तजाब अली, अहमद हुसैन, फ़ाज़िल और नवेद ने नात व मनक़बत पेश की। कारी गुलाम यासीन ने अपने बयान में कहा कि सय्यद मौलवी अब्दुल क़दीर मियां रहमतुल्लाह अलैह औलाद-ए-गौसे आज़म और मादरज़ाद वली थे, जिन्होंने हज़रत वली मियां हुज़ूर की तरबीयत मुकम्मल अंदाज़ में की। बताया गया कि हज़रत वली मियां अपने पीरो-मुर्शिद के विसाल के बाद हर वर्ष 17 मई को कुल शरीफ़ का आयोजन करते थे और यह परंपरा आज भी सज्जादानशीं अनवर मियां की सरपरस्ती में जारी है।फ़ातिहा के बाद मुल्क की सलामती और अमन-चैन के लिए दुआ की गई। कार्यक्रम में सय्यद नाज़िर अली (चांद), हाजी आरिफ उल्लाह, अब्दुल जब्बार, शराफ़त, इफ़्तिखार हुसैन, रियासत, फ़िरासत, मोहम्मद आरिफ, मुदस्सर सिद्दीकी, आज़म हुसैन, अख़लाक़ अहमद, हाफिज उवैस, हाजी रेहान और कमर गनी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।