जनगणना 2026 ड्यूटी में अनियमितताओं पर शिक्षक संघ ने उठाई आवाज, डीएम को सौंपा स्मारक पत्र
बदायूं। जनगणना 2026 के तहत प्रगणक एवं सुपरवाइजर ड्यूटी में कथित अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (प्रा. संवर्ग) ने एक बार फिर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन के जिला सह संयोजक प्रदीप कुमार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को स्मारक पत्र सौंपकर विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग की।
संगठन ने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा 6 अप्रैल 2026 को जारी निर्देशों के बावजूद तहसीलों एवं नगरपालिकाओं द्वारा नियमों की अनदेखी की जा रही है। विशेष रूप से गंभीर रूप से बीमार, दिव्यांग एवं गर्भवती महिला शिक्षकों को भी जनगणना ड्यूटी में लगाया जाना न्यायोचित नहीं बताया गया। जबकि इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में ही पूरा डाटा उपलब्ध कराया जा चुका है।
इसके अलावा शिक्षकों की ड्यूटी उनके कार्यस्थल या निवास क्षेत्र से दूर लगाए जाने पर भी नाराजगी जताई गई। संगठन ने मांग की कि कार्मिकों की तैनाती यथासंभव उनके कार्य क्षेत्र या नजदीकी स्थान पर ही की जाए, जिससे कार्य निष्पादन में सुविधा हो सके।
महासंघ ने यह भी मांग रखी कि प्रधानाध्यापक एवं इंचार्ज प्रधानाध्यापक को जनगणना ड्यूटी से पूर्णतः मुक्त रखा जाए, ताकि विद्यालयों का शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हो। साथ ही सुझाव दिया गया कि बेसिक शिक्षा के अलावा माध्यमिक शिक्षा एवं अन्य विभागों से भी कार्मिकों की तैनाती कर संतुलन बनाया जाए।
स्मारक पत्र में पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने की स्थिति में केवल एक को ही ड्यूटी देने, सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके शिक्षकों को ड्यूटी से मुक्त रखने तथा ग्रीष्मावकाश के दौरान ड्यूटी लगाने पर नियमानुसार अर्जित या प्रतिपूरक अवकाश देने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।संगठन का कहना है कि इन बिंदुओं पर प्रशासन द्वारा संवेदनशील एवं व्यवहारिक निर्णय लिया जाता है तो इससे न केवल शिक्षक समुदाय का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को भी अधिक सुव्यवस्थित, प्रभावी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी।अंत में महासंघ ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि उपरोक्त मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। संगठन ने यह भी बताया कि इसी संबंध में 17 अप्रैल 2026 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से पूर्व में भी एक अनुरोध पत्र प्रेषित किया जा चुका है।















































































