बरेली। मौलाना वली मोहम्मद (वली मियां) के उर्स के पहले दिन शुक्रवार को दरगाह पर अकीदत और रूहानियत का माहौल बना रहा। फज्र की नमाज़ के बाद कुरान ख्वानी हुई, जबकि दिन भर गुलपोशी का सिलसिला जारी रहा। मुंबई, हैदराबाद और दिल्ली सहित विभिन्न शहरों से पहुंचे ज़ायरीन ने दरगाह पर हाज़िरी देकर फूल पेश किए। हाफ़िज़ जानिसार अख्तर और हाफ़िज़ मेहंदी की कयादत में जसपुर से 60 लोगों का काफिला भी आस्ताने पर पहुंचा। रात में तकरीर प्रोग्राम का आगाज़ कारी गुलाम यासीन ने कलाम-ए-पाक की तिलावत से किया। इसके बाद सलीम जसपुरी, रफ़िया और हाफ़िज़ मेहंदी सहित अन्य नातख्वानों ने नात व मनकबत पेश की। तकरीर के दौरान मुफ़्ती नसीमउद्दीन और मौलाना कारी इलियास कादरी ने तालीम की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को दीनी और दुनियावी दोनों तरह की शिक्षा हासिल कर अपने मां-बाप, शहर और देश का नाम रोशन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुसलमान अमन पसंद होता है और बुजुर्गों की तालीम इसी राह पर चलने की सीख देती है। उलमा ने अपने बयान में अल्लाह के औलिया की पहचान बताते हुए कहा कि सच्चे बंदे वही होते हैं जो अल्लाह की पसंद और नापसंद के मुताबिक अपनी जिंदगी ढालते हैं। साथ ही उन्होंने तौबा, जिक्र और नेकी की दावत को इंसान की असल कामयाबी का रास्ता बताया। मौलाना कारी इलियास कादरी ने कहा कि इंसान को दुनियावी चमक-धमक से दिल लगाने के बजाय अल्लाह और उसके रसूल से मोहब्बत करनी चाहिए, यही असली सुकून और कामयाबी का रास्ता है। प्रोग्राम के अंत में सलाम पढ़ा गया और दरगाह के सज्जादानशीन अनवर मियां ने देश और कौम की खुशहाली के लिए दुआ की। दरगाह के मीडिया प्रभारी सय्यद नाज़िर अली (चाँद) के अनुसार, शनिवार को विसाली कुल की रस्म अदा की जाएगी, जिसके बाद रात में तकरीर प्रोग्राम जारी रहेगा। इस मौके पर आरिफ़ उल्लाह,मोहसिन इरशाद,अकबर हुसैन,नवेद,सुलेमान फ़ारूकी,वली उल्लाह मोहम्मदी,फ़ैज़ी हक, शादाब,आदिल खान,अधिवक्ता ख़ान,फ़ाज़िल,सलीम खान,अर्श मोहम्मदी आदि मौजूद रहे।