बरेली। मौलाना वली मोहम्मद (वली मियां) के 36वें सालाना चार रोजा उर्स-ए-मोहम्मदी का आगाज गुरुवार को परचम कुशाई के साथ हो गया। परचम जुलूस नीम की चढ़ाई स्थित सलमान शमसी के घर से हाजी आरिफ उल्लाह की कयादत में निकला। जुलूस में मोहम्मद जफर शमसी हाथ में परचम लेकर सबसे आगे रहे, जबकि नात ख्वां हजरात नात व मनकबत पेश करते हुए चल रहे थे। परंपरा के अनुसार इस बार भी जुलूस में साउंड सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया गया। जुलूस के दौरान उमर कादरी, सईद शमसी और फराज शम्सी सहित अन्य लोगों ने जगह-जगह इस्तकबाल किया। फूटा दरवाजा क्षेत्र में मुजीब, हाजी तौसीफ, महताब शमसी और ताज़ीम शमसी ने फूल बरसाकर स्वागत किया। परचम अपने कदीमी रास्ते खन्नू मोहल्ला होते हुए जखीरा बजरिया स्थित मोहम्मद असलम के घर पहुंचा, जहां फातिहा ख्वानी की गई और लंगर का इंतजाम किया गया। रास्ते में जगह-जगह शर्बत भी वितरित किया गया। यहां से आगे बढ़ने के बाद बाग वाली मस्जिद के आगे सड़क खराब व पानी भरे होने की वजह से दिक्कत का सामना करना पड़ा। इसके बाद जुलूस किला फाटक, तिलक स्कूल, इंग्लिश गंज, चिश्तिया पैलेस और दुलहा मियां के मजार से होता हुआ वली चौक स्थित दरगाह वली मियां पहुंचा। शाम को सज्जादानशीन अल्हाज अनवर मियां को परचम सौंपा गया और मजार पर चादर पेश की गई। इस मौके पर अनवर मियां ने सभी के लिए दुआ की। इस मौके पर वारिस उल्लाह, शराफत, अब्दुल जब्बार, अब्दुल कादिर, अब्दुल कय्यूम, कैफी उल्लाह, जुबैर शमसी, गाजी, अशफाक हुसैन, शाहनवाज खान, मोहसिन, मुदस्सर, हारून खां और सय्यद शाहकार हुसैन सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। उर्स ए मोहम्मदी में 24 अप्रैल को सुबह बाद नमाज़ फ़ज्र कुरान ख्वानी और बाद नमाज़ इशा(रात 10 बजे) तकारीर होगी।