सज्जादानशीन के सुपुर्द-ए-खाक के वक़्त हज़ारो अकीदतमंद शामिल रहे
बरेली। दरगाह आले रसूल खानकाह वामिकिया निशातिया के सज्जादानशीन पीरे तरीकत सय्यद मोहम्मद मियां वामिकी अशरफी हुजूर बुधवार को दुनिया-ए-फानी को अलविदा कह गए। बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे शाहदाना रोड स्थित दरगाह वामिकी परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
साहिब-ए-सज्जादा के इंतकाल की खबर सुनकर बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी ख़ाँ वारसी अपने मेम्बर्स के साथ पहुँचे और नायब सज्जादानशीन एवं प्रबंधक हज़रत मौलाना सय्यद असलम मियाँ वामिकी से मुलाक़ात कर गम का इज़हार किया। सज्जादानशीन को खिराजे अक़ीदतमन्द पेश कर मग़फ़िरत की दुआ की।शाम से ही खानकाह पर बड़ी तादाद में लोग पहुंचने लगे थे खानकाह नियाजिया के प्रबंध जुनैदी मियां नियाजी व मौलाना कासिम नियाजी,खानकाह शराफतिया सकलैनिया के सज्जादानशीन अल्हाज गाजी मियां सकलैनी पहुंचे और खानकाह के नायब सज्जादानशीन एवं साहबजादे मौलाना सय्यद असलम मियां वामिकी से मिलकर गम का इज़हार किया।
खानकाह-ए-वामिकिया के सज्जादानशीन हजरत सय्यद मोहम्मद मियाँ वामिकी अशर्फी जिलानी को आज जुमेरात के दिन सुबह सुपुर्द-ए-खाक किया गया उनके जनाजे में हजारों अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ा। दरगाह हज़रत शाहदाना वली से लेकर खानकाह-ए-वामिकिया के आसपास की गलियों और छतों पर जनसैलाब नज़र आ रहा था। दरगाह हज़रत शाहदाना वली परिसर में नमाज-ए-जनाजा गुरुवार सुबह 8 बजे शाहदाना दाना वली सरकार दरगाह परिसर में हजरत सय्यद मोहम्मद मियाँ वामिकी की नमाज-ए-जनाजा अदा हुई। नमाज ए जनाज़ा में बरेली सहित यूपी के कई जिलों,दिल्ली,मुंबई राजस्थान, बिहार,मध्य प्रदेश आदि जगहों के मुरीद बड़ी तादाद में हजारों शामिल हुए। नमाज ए जनाज़ा के बाद गमगीन माहौल में सज्जादानशीन को खानकाह-ए-वामिकिया परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। देशभर की खानकाहों के सज्जादानशीन पहुंचे
जनाजे में शिरकत करने के लिए देशभर की खानकाहों के सज्जादानशीन और खादिम बरेली पहुंचे। खानकाह-ए-अशरफिया से जफर मियां अशरफी, खानकाह-ए-शराफतिया व सकलैनिया से गाज़िया गाज़ी मियां सहित कई अन्य खानकाहों के सज्जादानशीन, उलेमा और सूफी बुजुर्गों ने शिरकत की। सभी लोगों ने सज्जादानशीन के लिए मगफिरत की दुआ की।
80 साल की उम्र में हुआ था इंतकाल खानकाह-ए-वामिकिया के सज्जादानशीन हजरत सय्यद मोहम्मद मियाँ वामिकी अशर्फी जिलानी का बुधवार को 80 वर्ष की उम्र में इंतकाल हो गया था। वह लंबे समय से ह्दय रोग बीमारी से ग्रस्त थे उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी सिलसिला-ए-अशरफिया के प्रचार और कौमी एकता के लिए समर्पित कर दी। उनके लाखों मुरीद देश-विदेश में है।
हजरत सय्यद मोहम्मद मियाँ वामिकी का जाना सूफी जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है। उनके जनाजे में उमड़ा जनसैलाब इस बात का सबूत है कि उन्होंने लाखों दिलों में मोहब्बत लेकर बसे।कौमी एकता मोहब्बत और भाईचारे के पैगाम को लोग हमेशा याद रखेंगे।
सज्जादानशीन के भतीजे सय्यद सलमान अली वामिकी ने बताया कि 80 वर्षीय हज़रत सय्यद मोहम्मद मियां का पिछले कुछ समय से हृदय रोग का इलाज चल रहा था। सुबह फज्र की नमाज के बाद उन्होंने अपने साहबजादे असलम मियां से तस्बीह मांगी और पढ़ने लगे। तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इस पर उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया, मगर रास्ते में ही सज्जादानशीन इस दुनिया से रुक्सत हो गये।
बरेली शरीफ़ की खानकाह वामिकिया निशातिया के सज्जादानशीन पीरे तरीकत सज्जादानशीन हज़रत मोहम्मद मियां वामिकी अशरफी ने खानकाह वामिकिया निशातिया की 47 वर्ष तक गद्दी संभाली। इसमें उन्होंने दीनी और समाजी खिदमात को अंजाम देते हुए खानकाही जिम्मेदारी को अंजाम दिया। शाहदाना रोड स्थित खानकाह की स्थापना हजरत सज्जादानशीन मोहम्मद मियां के दादा हजरत सय्यद निशात मियां ने 1908 में की थी। हजरत निशात मियां खानकाह के पहले सज्जादा रहे। उनके बाद 1946 में हजरत सय्यद वामिक मियां ने सज्जादानशीन की जिम्मेदारी को संभाली। वालिद वामिक मियां के विसाल के बाद 1976 से हज़रत मोहम्मद मियां ने गद्दी को संभाला अब यह जिम्मेदारी साहिबजादे नायब सज्जादानशीन मौलाना सय्यद असलम मियां वामिकी संभालेंगे।
दुआ ए मगफिरत करने वालो में प्रोफेसर मौलाना महमूद हुसैन,बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी ख़ाँ वारसी, हज ट्रेनर हाजी यासीन कुरैशी, अहमद उल्लाह वारसी, हाजी साकिब रज़ा ख़ाँ आदि ने की।














































































