राम कथा महोत्सव के आठवे दिन सेवा और संस्कार की भावधारा में डूबे श्रद्धालु
बदायूँ । जनपद के रिसौली में राम कथा आयोजन समिति के तत्वावधान में चल रहे श्री राम कथा महोत्सव के आठवें दिवस पर कथा स्थल श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं से सराबोर रहा। कथा व्यास द्वारा प्रस्तुत प्रसंगों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
कथा के दौरान बताया गया कि राजा दशरथ ने राज्यसभा में दर्पण (सीसा) मंगवाकर अपने मुकुट को ठीक किया और कानों के पास सफेद बाल देखकर उन्होंने भगवान श्रीराम को राज्याभिषेक देने का निर्णय लिया। सभा में उपस्थित सभी मंत्रियों एवं गुरुओं ने इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया। गुरु वशिष्ठ की आज्ञा लेकर तैयारियां प्रारंभ कर दी गईं।इसी बीच देवताओं की इच्छा से सरस्वती ने मंथरा की बुद्धि भ्रमित कर दी। मंथरा ने रानी कैकेयी को भड़काया, जिससे मोह और लोभ के प्रभाव में आकर कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांग लिए। राजा दशरथ के वचनबद्ध होने के कारण श्रीराम को अयोध्या त्यागकर वनवास जाना पड़ा।कथा में कैकेयी का कोपभवन जाना, दशरथ- कैकेयी संवाद, सुमंत्र द्वारा श्रीराम को बुलाना, श्रीराम- कैकेयी एवं श्रीराम- दशरथ संवाद, अयोध्यावासियों का विषाद, श्रीराम- कौशल्या, श्रीराम- सीता एवं श्रीराम- लक्ष्मण संवाद जैसे मार्मिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया।इसके पश्चात श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन, श्रृंगवेरपुर में निषादराज की सेवा, केवट प्रसंग, गंगा पार कराना, भारद्वाज आश्रम (प्रयागराज) आगमन, महर्षि वाल्मीकि से संवाद और चित्रकूट निवास के प्रसंगों ने भक्तों को भावुक कर दिया। वनवास के दौरान कोल-भील और वनवासियों द्वारा की गई सेवा का भी वर्णन किया गया।अंत में सुमंत्र के अयोध्या लौटने और राजा दशरथ के निधन का हृदयविदारक प्रसंग सुनाकर कथा को विराम दिया गया, जिससे पूरे पांडाल में शोक की लहर दौड़ गई।कथा के यजमान राधेश्याम पाली सहित पंडित सोनू शर्मा, विपिन कुमार सिंह, मोहित प्रभाकर, विकास चौहान, आदित्य गुप्ता, अंकित चौहान, सतीश कश्यप, भानू चौहान, अवधेश माहेश्वरी, योगेश बजाज, अतुल सोलंकी, दुष्यंत सोलंकी, बबली, खुशी, सविता, तृषा, राजेंद्र प्रसाद, पुनेश भारद्वाज समेत सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर प्रसाद ग्रहण किया।














































































