बरेली। कायस्थ सेना कल्याण परिवार की प्रेरणा से वृद्धाश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन परम पूज्य आचार्य मुमुक्षु कृष्ण दद्दा महाराज ने महारास, उद्धव प्रसंग, कंस वध, रुक्मिणी मंगल और परीक्षित उद्धार की दिव्य कथाएं सुनाईं। उन्होंने महारास को आत्मा और परमात्मा का मिलन, तथा रुक्मिणी विवाह को भक्ति और प्रेम का प्रतीक बताया। कंस वध बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक बना। कथा में भक्तिपूर्ण माहौल रहा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का आनंद लिया। कायस्थ सेना कल्याण परिवार के प्रदेश अध्यक्ष आलोक प्रधान एडवोकेट ने बताया कि भागवत कथा के अंतिम दिन मुख्य यजमान राजेंद्र पाल सिंह एवं सुशील सिंह का कायस्थ सेना द्वारा स्वागत किया गया अंतिम दिन अतिथि के रूप में डॉ राघवेंद्र शर्मा विधायक बिथरी एवं वन मंत्री डॉ अरुण सक्सेना रहे।आज की कथा में सैकड़ों वृद्धों के अतिरिक्त कायस्थ सेना कल्याण परिवार के संरक्षक संजीव कुमार सक्सेना,प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रविन्द्र नाथ श्रीवास्तव,रवि सक्सेना अवधपुरी,मनोज सक्सेना धूप, प्रदेश महासचिव श्यामदीप सक्सेना प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य आलोक सक्सेना एडवोकेट, सुनील सक्सेना , उर्मिला जौहरी ,सीमा प्रधान , नेहा सक्सेना ,जिला अध्यक्ष आलोक कुमार सक्सेना , अमित सक्सेना,डॉ नितिन सक्सेना, डॉ सुबोध अस्थाना, आर के श्रीवास्तव आदि प्रमुख रूप से रहे।