आचमन का बदायूँ में शुद्ध साहित्यिक कवि सम्मेलन हुआ,काव्य की रसधारा से सराबोर रहे श्रोता
बदायूं। आचमन फाउंडेशन द्वारा कल बदायूं क्लब में पाँचवा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमे देर रात तक श्रोताओं ने देश के प्रख्यात कवियों की विभिन्न रसों की कविताओं का भरपूर आनंद लिया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ आचमन सम्मान से सम्मानित डॉ.शिव ओम अंबर, नगर विधायक श्री महेश चंद्र गुप्ता, दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह,भाजपा जिलाध्यक्ष श्री राजीव कुमार गुप्ता, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण हृदयेश कठेरिया, राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ के विभाग प्रचारक श्री विशाल द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्जवलित कर किया। सभी अतिथियों का स्वागत आचमन संस्था के संस्थापक युगल कवयित्री डॉ सोनरूपा विशाल एवं प्रसिद्ध व्यवसायी श्री विशाल रस्तोगी द्वारा किया गया। इस अवसर पर पाँचवा ‘आचमन सम्मान’ विख्यात वरिष्ठ कवि फरुखाबाद से आये डॉ. शिव ओम अंबर जी को प्रदान किया गया।इससे पहले जनवरी में हुई डॉ.उर्मिलेश ‘गायेंगे गाएंगे हम वन्दे मातरम’ प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार दिया गया।आचमन सम्मान समारोह के बाद एक शानदार कविसम्मेलन का आग़ाज़ हुआ। पंचम आचमन सम्मान से सम्मानित गीतकार डॉ. शिवओम अंबर जी की अध्यक्षता में एवं डॉ. सोनरूपा के संचालन में उन्नाव से पधारे प्रसिद्ध गीतकार स्वयं श्रीवास्तव ,देवबंद से शायर डॉ.नदीम शाद,लखनऊ से आयीं कवयित्री डॉ.मालविका हरिओम,गाज़ियाबाद से ओज कवि मोहित शौर्य,जोधपुर से युवा कवयित्री आयुषि राखेचा प्रेरणा,अयोध्या से गीतकार रामायण धर द्विवेदी,गोपालगंज बिहार से कवि सर्वेश तिवारी श्रीमुख,बदायूँ से शायर कुमार आशीष,उदयपुर से कवयित्री रश्मि शर्मा ने अपनी अविस्मरणीय प्रस्तुति से आयोजन को सार्थकता प्रदान की। कवियों की ज़ोरदार प्रस्तुति ने श्रोताओं को दाद पर दाद देने के लिए मजबूर कर दिया।
रश्मि शर्मा ने अपने गहन गीतों और पुष्ट छन्दों से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई –

भावना की इस नदी को मैं क्षणिक विश्राम लिख दूँ,
उर्मियाँ व्याकुल हृदय की लो तुम्हारे नाम लिख दूँ…
रामायण अपने गीतों की सुंदर प्रस्तुति देने के लिए जाने जाते हैं।
उन्होंने कहा-
दर्द को दान में नहीं लेती
अश्रु भी ध्यान में नहीं लेती
नींद आती है बार – बार मगर
आँख संज्ञान में नहीं लेती
मोहित शौर्य ने अपनी ओजस्वी वाणी से कवि सम्मेलन में देशभक्ति की धारा प्रवाहित कर दी।उन्होंने कहा-
ज़िंदगी जीने के जुनून तक जाएगा
मेहनत के पसीने और खून तक जाएगा
पैसों की तलाश है तो हाईवे पकड़ लो
यह गाँव का रास्ता है सुकून तक जाएगा
कुमार आशीष की ग़ज़लों को ख़ूब दाद मिली।उन्होंने कहा –
बोझ दिल पर कहाँ तक लिए घूमते,
दर्द लिखते रहे, गीत गाते रहे,
ज़ख़्म दुनिया ने हमको दिये उम्र -भर
और हम उम्र -भर मुस्कुराते रहे।
जोधपुर से आयीं आयुषि राखेचा के शानदार गीतों और मुक्तकों को श्रोताओं ने ख़ूब पसंद किया।उन्होंने कहा –
बदन के खोल में सदियों से बंद मैं ही हूँ
बजाए इसके भी इतनी बुलंद मैं ही हूँ
मुझे पसंद है सारे ही ख़ुश मिज़ाज मगर
उदास लोगों की पहली पसंद मैं ही हूँ
लखनऊ से आयीं डॉ. मालविका हरिओम ने कई ग़ज़लों और गीतों से समा बाँधा –
तमाम उम्र मंज़िलों की फ़िक्र में गुज़री
वहाँ पहुँच के लगा रास्ते ही बेहतर थे।
पौराणिक संदर्भों के साथ वर्तमान के संदर्भों को पिरो कर सर्वेश तिवारी श्रीमुख ने ज्वलंत प्रश्न उठाये –
जब समाज में मर्यादा के वस्त्र उतारे जाएंगे,
द्रोण भीष्म जैसे बुजुर्ग भी छल से मारे जाएंगे।
अपने युग की पीड़ा पर जो लोग मौन साधते हैं,
वे भविष्य की चर्चाओं में बस दुत्कारे जाएंगे।
डॉ.नदीम शाद अपनी शाईस्ता शायरी के हवाले से जाने जाते हैं।उनके हर शेर को श्रोताओं की वाह वाही मिली।उन्होंने कहा-
ज़रा सा सब्र था जो कर गए हम
उसे लगने लगा था मर गए हम
ये नाक़द्री हमारी इस लिए है
तेरा होने में जल्दी कर गए हम
आयोजन की संस्थापक डॉ. सोनरूपा विशाल को भी लोगों ने बहुत मन से सुना –
मन करता है ऐसा हो
तू बिल्कुल् मुझ जैसा हो
मिलने का वादा तो कर
सच्चा झूठा जैसा हो

प्रख्यात कवि स्वयं श्रीवास्तव ने अपने चिर परिचित अंदाज़ से सबका ह्रदय जीत लिया।उनके अनेक मुक्तकों की लड़ी ने श्रोताओं को तालियां बजाने को मजबूर कर दिया।श्रोताओं की माँग पर उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कविताओं का पाठ किया।
उन्होंने कहा-
मुश्किल थी संभलना ही पड़ा घर के वास्ते,
और घर से निकलना ही पड़ा घर के वास्ते,
मजबूरियों का नाम हमने शौक रख दिया,
और शौक बदलना ही पड़ा घर के वास्ते!
अंत में जब अंबर जी ने माइक हाथ में लिया तो पूरा वातावरण सुगंधित हो गया।उनके गीतों एवं कविताओं ने समारोह को पूर्णता प्रदान की।
चंद आंसू चंद आहें और कुछ ग़ज़लें
ये हमारी जिन्दगी भर की कमाई है।
लेखनी होगी तुम्हारी दृष्टि में मित्रों,
हाथ में गंगाजली हमने उठाई है।
इस अवसर पर पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया।जिसमें जनपद के अनेक साहित्यकारों की पुस्तकें सम्मलित की गयीं।इसआयोजन में दीपमाला गोयल,सरला स्वरुप,डॉ राम बहादुर व्यथित,अशोक खुराना,शरद शंखधार, मंजुल शंखधार, डॉ. उपदेश शंखधार, सुभाष अग्रवाल, अनूप रस्तोगी, नितिन गुप्ता,प्रशांत गुप्ता,सौरभ शंखधर ज्ञानानंद पांडे,डॉ.भास्कर शर्मा,प्रदीप शर्मा शोभित वैश्य, शलभ वैश्य, दिवम विशाल, नितिन अग्रवाल,वैभव विजय गुप्ता, डॉ सी के जैन, डॉ. तन्मय रस्तोगी,अमर वैश्य,डॉ. आशीर्वाद वशिष्ठ, कवि नरेंद्र गरल, डॉ. कमला माहेश्वरी, अंजलि शर्मा, अंजू शर्मा,गुंजन गुप्ता,पूजा गुप्ता,रुचि अग्रवाल,सरला चक्रवृती, प्रदीप अग्रवाल,सुबोध गोयल,रचित गोयल,वैभव वैश्य, डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी, डॉ. गायत्री प्रियदर्शनी,डॉ.दीप्ति गुप्ता,डॉ. प्रतिभा गुप्ता,अखिलेश ठाकुर, रवींद्र मोहन सक्सेना, डॉ. अजीत पाल सिंह, सुधांशु शर्मा, हितेंद्र शंखधार, विजय मिश्रा, संजय आर्य, महाराज सिंह, राहुल चौबे, रितिका गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन का सम्मान सत्र का सञ्चालन डॉ. अक्षत अशेष ने किया एवं कवि सम्मेलन का सञ्चालन डॉ. सोनरूपा विशाल ने किया।














































































