युद्ध से विजय मिल सकती है, शांति नहीं: सम्राट अशोक के आदर्श आज भी प्रासंगिक
बरेली। मिशन कंपाउंड स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में महान सम्राट अशोक की जयंती पर पार्टी नेतृत्व के निर्देशानुसार एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर उपाध्यक्ष राजेश मौर्य ने की, जबकि संचालन निवर्तमान जिला सचिव बृजेश श्रीवास्तव सविता ने किया।
गोष्ठी में वक्ताओं ने सम्राट अशोक के जीवन, उनके विचारों और मानवता के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। महानगर उपाध्यक्ष राजेश मौर्य ने कहा कि सम्राट अशोक भारतीय इतिहास के महान शासकों में से एक थे, जिन्होंने न केवल एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया, बल्कि हिंसा का मार्ग छोड़कर अहिंसा, शांति और मानवता का संदेश पूरी दुनिया को दिया। उन्होंने कहा कि अशोक का नाम आज भी राष्ट्रीय प्रतीक और अशोक चक्र के रूप में देश को प्रेरित करता है।
निवर्तमान जिला उपाध्यक्ष मनोहर सिंह पटेल ने कहा कि सम्राट अशोक का जन्म लगभग 304 ईसा पूर्व पाटलिपुत्र में हुआ था। उन्होंने यह सिद्ध किया कि सच्ची महानता शक्ति में नहीं, बल्कि करुणा और नैतिकता में होती है। “युद्ध से विजय मिल सकती है, लेकिन शांति से दिल जीते जा सकते हैं,” उनका यह संदेश आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक है।
अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र सोनकर ने कहा कि कलिंग युद्ध के बाद हुए भारी रक्तपात से सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाकर अहिंसा, सत्य, करुणा और जनकल्याण को अपने शासन का आधार बनाया।
महानगर उपाध्यक्ष शेर सिंह गंगवार ने बताया कि सम्राट अशोक ने अपने साम्राज्य में जगह-जगह शिलालेख और स्तंभ स्थापित कराए, जिन पर ‘धम्म’ के सिद्धांत अंकित हैं। ये शिलालेख आज भी सारनाथ, बोधगया और लुंबिनी जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर मौजूद हैं।
कार्यक्रम में रामप्रकाश लल्ला यादव, पार्षद राजेश अग्रवाल, सिंपल कन्नौजिया, कैंट विधानसभा अध्यक्ष हरिओम प्रजापति, सोनू बाल्मीकि, रोहित राजपूत, अनुज मौर्य, गंगा सिंह यादव, हरभजन सिंह शाक्य, राजेंद्र लोधी सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।














































































