डीपीएस स्कूल में 29 मार्च को मोटिवेशनल स्पीकर अवध ओझा विद्यार्थियों से संवाद करेंगे
बदायूँ। क्या ज्ञान केवल कक्षाओं में श्यामपट से बच्चों के बस्ते तक सीमित है, या फिर किताबों की इबारत को कॉपियों पर उकेर देना ही शिक्षा है? वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इन सवालों पर गंभीरता से विचार करते हुए DPS बदायूँ ने शिक्षा के पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़कर एक नई पहल की है।
विद्यालय का मानना है कि यदि शिक्षा केवल रटने और लिखने तक सीमित रह जाए, तो यह बच्चों के समग्र विकास के बजाय उनके व्यक्तित्व को सीमित कर देती है। इसी सोच के साथ DPS बदायूँ ऐसे बच्चों को तैयार कर रहा है जो न केवल ज्ञान अर्जित करें, बल्कि प्रश्न पूछने, तर्क करने और समझ विकसित करने की क्षमता भी रखें।
इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए विद्यालय में “जूनियर सिविल एस्पिरेंट” नामक शैक्षिक गतिविधि संचालित की जा रही है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 5 से ऊपर के सभी छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन एक विशेष पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है, जो उन्हें भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करता है।
इस गतिविधि की संरचना भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तर्ज पर की गई है, जिसमें प्रत्येक वर्ष प्रारंभिक परीक्षा (Prelims), उसके बाद मुख्य परीक्षा (Mains) और अंत में साक्षात्कार (Interview) की प्रक्रिया आयोजित की जाती है। मुख्य परीक्षा में सफल छात्र-छात्राएं ही साक्षात्कार के लिए चयनित होते हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का विकास होता है।
विद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह पहल छात्रों में विश्लेषणात्मक सोच, निर्णय क्षमता और नेतृत्व गुण विकसित करने में सहायक सिद्ध हो रही है। बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ने के साथ-साथ वे अपने भविष्य के प्रति अधिक सजग और लक्ष्य केंद्रित बन रहे हैं।
इस अभिनव शैक्षिक गतिविधि की जानकारी जब प्रख्यात शिक्षक और मोटिवेशनल स्पीकर अवध ओझा को दी गई, तो उन्होंने इसे बेहद सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई अन्य विद्यालय नहीं है, जो इस प्रकार से बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रारंभिक स्तर से ही तैयार कर रहा हो।
उन्होंने DPS बदायूँ के इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए छात्रों को अपना आशीर्वाद देने की सहमति भी प्रदान की।
इसी क्रम में अवध ओझा 29 मार्च को सांय 5 बजे DPS बदायूँ पहुंचेंगे, जहां वे छात्रों से संवाद करेंगे और उन्हें मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। इस अवसर को लेकर विद्यालय में उत्साह का माहौल है और छात्र-छात्राएं इस विशेष सत्र का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
विद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के नवाचार ही शिक्षा को वास्तविक अर्थों में सार्थक बनाते हैं और बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं।














































































