“सनराइज अस्पताल कांड: जनआक्रोश उफान पर, सिस्टम पर गंभीर सवाल—क्या आरोपियों को बचाया जा रहा है?”
बरेली में सनराइज अस्पताल कांड अब एक परिवार की लड़ाई से निकलकर जनआंदोलन का रूप ले चुका है। इंसाफ की मांग को लेकर चल रहे धरने में अब कई बड़े संगठन खुलकर सामने आ गए हैं, जिससे साफ है कि यह मुद्दा अब जनता बनाम सिस्टम की लड़ाई बन चुका है। सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में चल रहा धरना लगातार मजबूत हो रहा है और प्रशासन की चुप्पी अब लोगों के गुस्से को और भड़का रही है।
यादव महासभा के कई बड़े पदाधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर समर्थन दिया। वहीं विश्व हिंदू महासंघ के नीरज सैनी और किसान एकता मंच की ओर से ममता मौर्य भी धरना स्थल पहुंचे और परिवार के साथ खड़े होने का ऐलान किया। अब खबर है कि कल किसान एकता संघ के करण सिंह यादव भी समर्थन देने पहुंचेंगे, जिससे आंदोलन और तेज होने की पूरी संभावना है।
इस बीच मामला तब और गंभीर हो गया जब सीएमओ के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। विश्व हिंदू महासंघ के पदाधिकारी नीरज सैनी के मुताबिक सीएमओ ने दावा किया कि परिवार कार्रवाई नहीं चाहता और उसने लिखित में कुछ दिया है। लेकिन पीड़ित परिवार ने इस बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया—और सीएमओ गलत बयानबाजी कर रहे हैं।
यही वह बिंदु है जहां से प्रशासन की भूमिका पर सबसे बड़े सवाल खड़े होते हैं। क्या सच को दबाने की कोशिश हो रही है? क्या अपराध को कागजों में दबाकर आरोपियों को बचाने की रणनीति बनाई जा रही है? जिस मामले में मेडिकल बोर्ड दोष तय कर चुका है, वहां कार्रवाई के बजाय ऐसे बयान देना सीधे-सीधे प्रशासनिक नीयत पर शक पैदा करता है। आरोप तो यहां तक लग रहे हैं कि पूरा स्वास्थ्य विभाग ही आरोपियों को बचाने में लगा हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक यादव महासभा आज शाम को सीएमओ से मुलाकात करेगी, जिसके बाद बड़े आंदोलन का ऐलान हो सकता है। चेतावनी साफ है—अगर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो सड़कों से लेकर दफ्तरों तक घेराव होगा।
परिवार का साफ कहना है कि जब तक आरोपी डॉक्टर रेहान अहमद और मैनेजर सोहेल खान की गिरफ्तारी नहीं होती, अस्पताल को सील कर उच्चस्तरीय जांच शुरू नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।
मेडिकल रिपोर्ट में दोष तय, घोटाले की पुष्टि, बढ़ता जनसमर्थन—इसके बावजूद कार्रवाई शून्य। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक नाकामी और संवेदनहीनता की चरम स्थिति है। अब सवाल यही है—क्या सिस्टम सच में न्याय देगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?














































































