रोड चौड़ीकरण: नगर निगम के नोटिस के बाद व्यापारियों में नाराज़गी, 110 से ज्यादा दुकानों पर चलेगा बुलडोजर

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बरेली। सीएम ग्रिड्स फेस 2 परियोजना के तहत कोहड़ापीर पेट्रोल पंप से लेकर जीआरएम स्कूल होते हुए कुदेशिया पुल तक और कोहड़ापीर पेट्रोल पंप से सूद धर्म कांटे रोड का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस कार्य के लिए नगर निगम ने मस्जिद , व्यापारियों और मकान, मकान, दुकान मालिकों को नोटिस जारी किया है, जिसमें उनको एक सप्ताह के भीतर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया है।
नगर निगम के नोटिस में कहा गया है कि संबंधित व्यक्तियों ने सड़क, फुटपाथ और सार्वजनिक भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया है, जिससे यातायात और आम जनता को असुविधा हो रही है। नोटिस में व्यापारियों को एक सप्ताह के भीतर अपने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया गया है, अन्यथा निगम स्वयं कार्रवाई करेगा और इसका खर्च संबंधित व्यक्तियों से वसूल किया जाएगा।
इस चौड़ीकरण के दायरे में कोहड़ापीर पर स्थित एक पुरानी मस्जिद और उसके आसपास बनी दो दुकानें भी आ रही हैं। स्थानीय निवासी वसीम का कहना है कि मस्जिद और उसकी दुकानें बहुत पुरानी है 45 से 60 साल पुरानी दुकानें हैं, 124 साल पुरानी मस्जिद है, जिन्हें नोटिस के तहत हटाने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यहाँ पर जाम नहीं है और मार्केट की वजह से लोगों को परेशानी नहीं हो रही, इसलिए मस्जिद और दुकानों पर कार्रवाई अनुचित है।
व्यापारी तुषार आनंद ने बताया कि नगर निगम ने लगभग डेढ़ महीने पहले निशान लगाकर 15-20 दिन पहले नोटिस जारी किया। उन्होंने कहा कि नगर निगम पुराने अंग्रेज़ी दौर के नक्शे का हवाला दे रहा है,और सड़क चौड़ीकरण के लिए बहुत अधिक जगह ली जा रही है। आनंद ने बताया कि केवल फुटपाथ और रोड के लिए इतने बड़े हिस्से की आवश्यकता नहीं है और इससे 120 दुकानों और उसे चलने वाले परिवारों की रोजी रोटी प्रभावित होगी।
एक अन्य व्यापारी ने भी नगर निगम की कार्रवाई को नाजायज करार दिया और कहा कि यदि रोड चौड़ी करनी है तो जायज हिस्से में ही चौड़ीकरण किया जाए, ताकि व्यापारियों की रोजी रोटी प्रभावित न हो। उन्होंने सुझाव दिया कि एक तरफ से वन-वे व्यवस्था लागू की जाए और साइड में अतिरिक्त डिवाइडर या जगह का अतिक्रमण न किया जाए।
व्यापारी अपने नुकसान और रोजी रोटी की सुरक्षा के लिए प्रशासन से राहत की मांग कर रहे हैं, वहीं नगर निगम किसी भी सूरत में रियायत बरतने को तैयार नहीं है। इस मामले में दोनों पक्षों के बीच संतुलन बैठाना चुनौतीपूर्ण प्रतीत हो रहा है।

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