बाबा त्रिवटी नाथ मंदिर में श्रीरामचरितमानस कथा, कथा व्यास ने सप्तपुरियों का किया वर्णन
बरेली। शहर के प्राचीनतम बाबा त्रिवटी नाथ मंदिर में चल रही श्रीरामचरितमानस कथा में परम पूज्य कथा व्यास पंडित देवेंद्र उपाध्याय ने भक्तों को धर्म और भक्ति का महत्व बताते हुए सप्तपुरियों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि वेद और पुराणों में ‘पुरी’ उस स्थान को कहा गया है जहां मोक्ष की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्म के अनुसार सात पवित्र पुरियों का वर्णन मिलता है, जिन्हें मोक्ष प्राप्ति का श्रेष्ठ स्थान माना गया है।
कथा व्यास ने बताया कि इन सप्तपुरियों का संबंध भगवान श्रीराम के विभिन्न अंगों से बताया गया है। चरणों में अवंतिका पुरी, कमर में कांतिपुरी, नाभि में द्वारिका पुरी, हृदय में मायापुरी, गर्दन में मथुरा पुरी, नाक में काशी पुरी और मस्तक पर अयोध्यापुरी का स्थान माना गया है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम में सभी देवी-देवताओं का वास है और स्वयं भगवान शिव भी श्रीराम के नाम का गुणगान करते हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीराम का नाम लेने मात्र से मनुष्य के सभी दुख दूर हो सकते हैं और उसके पापों का भी नाश होता है, लेकिन इसके लिए मन का निर्मल और शुद्ध होना आवश्यक है। कथा के दौरान उन्होंने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब श्रीहनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तो वहां उन्हें एक कुटिया दिखाई दी, जहां भगवान राम का नाम और उनके धनुष-बाण अंकित थे।
कथा में हनुमान और विभीषण के मिलन का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि दोनों के हृदय में प्रभु के प्रति गहरा प्रेम और श्रद्धा थी। विभीषण ने हनुमान जी से कहा कि वह लंका में ऐसे रहते हैं जैसे दांतों के बीच जीभ रहती है और उन्हें आशा है कि प्रभु एक दिन उन्हें अवश्य अपनाएंगे। हनुमान जी ने उन्हें आश्वस्त किया कि प्रभु के प्रति उनका समर्पण अवश्य ही उन्हें भगवान के दर्शन कराएगा।
कथा व्यास ने कहा कि सच्चे मन से किया गया समर्पण ही मनुष्य को परमात्मा से जोड़ता है। इसमें जाति, धर्म और कर्म से अधिक महत्व हृदय की सच्ची भावना का होता है। यदि भक्त सच्चे भाव से प्रभु का स्मरण करे तो भगवान स्वयं अपने किसी भक्त के माध्यम से उस पर कृपा करते हैं।
कथा के समापन पर मंदिर के रामालय में उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रीरामायण की आरती की और प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के प्रताप चंद्र सेठ, मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल, सुभाष मेहरा और हरिओम अग्रवाल का विशेष सहयोग रहा।













































































