बरेली में अलखनाथ एवं तपेश्वर नाथ मंदिर को नए कॉरिडोर की जरूरत

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बरेली । अलखनाथ एवं तपेश्वर नाथ मंदिर को नए कॉरिडोर की जरूरत = आध्यात्मिक पर्यटन के नये केंद्र में उभर रहा नाथ नगरी
बरेली । अब बरेली की नाथ नगरी बन रहा है आध्यात्मिक पर्यटन का नया केंद्र। जबकि वास्तविकता यह है कि नाथ कॉरिडोर का लाभ बरेली को तब मिलेगा जब तपेश्वर नाथ मंदिर को पुराने बी एस ए ऑफिस/वाले मार्ग से होकर बीडीए कॉलोनी बदायूं रोड से जोड़ा जाए। साथ ही अलखनाथ मंदिर को हार्टमेन के पुराने रेल क्रॉसिंग से होकर चंपत राय बगिया होकर अलखनाथ तक रेल पटरी के समानांतर नई सड़क बनाई जाए। जिससे ही नाथ कॉरिडोर की वास्तविकता सार्थक हो पाएगी। साथ ही योगी जी का नाथ नगरी का सपना भी धरातल पर आएगा। अधिकारियों ने तो 32 किलोमीटर के मंदिरों को जोड़ने वाले “कनेक्टेड मार्ग” को ही कॉरिडोर का नाम देकर वास्तविक कॉरिडोर को पटरी से उतार कर केवल सरकारी धनराशि ठिकाने लगाने का लक्ष्य बना लिया है । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट 32 किलोमीटर वाले कथित नाथ कारिडोर के निर्माण में आ रहीं छिटपुट बाधाएं काफी हद तक अब दूर हो गई हैं। पर उसका वास्तविक लाभ तंग मार्ग एवं जाम के कारण पर्यटकों को कम ही मिलेगा ऐसा जागरूक नागरिकों का मानना है। मंडल आयुक्त भूपेंद्र एस चौधरी के निर्देश पर उपनिदेशक पर्यटन रविंद्र कुमार ने धार्मिक स्थलों पर निर्माण कार्यों को गति दिला दी है। फरवरी 2026 तक 32 किलोमीटर के नाथ कारिडोर के कई धार्मिक स्थलों के निर्माण को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था पर समय सीमा बीत भी गई । बरेली शहर के सात प्रमुख नाथ स्थलों पर एक साथ चल रही 75 करोड़ से अधिक की परियोजनाएँ धार्मिक पर्यटन के नए द्वार खोल रही हैं जिसका प्रस्ताव वर्ष 2024= 2025 में विभाग ने भेजा था जिसमें अलग अलग मद में 37 करोड़ रुपए मिल भी चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ सरकार का उद्देश्य सिर्फ मंदिरों का सौंदर्यीकरण नहीं बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक विरासत से युवाओं को जोड़ना और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करना भी है। बरेली की पहचान सदियों से एक महत्वपूर्ण नाथ तीर्थ के रूप में रही है। अब योगी सरकार इस विरासत को व्यवस्थित, आधुनिक और विश्वस्तरीय स्वरूप देने में जुटी है। हाल ही में बड़ी धनराशि जारी होने के बाद नाथ कॉरिडोर के सभी स्थलों पर निर्माण कार्य शुरू हो भी चुका है। अलखनाथ, तपेश्वर नाथ, पशुपतिनाथ, धोपेश्वर नाथ, वनखंडी नाथ, त्रिवटीनाथ, तुलसी मठ और कांवड़ स्थल- को एक ही सर्किट में जोड़ रही है। इसके तहत प्रत्येक स्थल पर आधुनिक विकासपरक सुविधाएं, सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार को गति मिली है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप बरेली को प्रमुख नाथ पर्यटन केंद्र बनाया जाए। कांवड़ मार्ग, प्राचीन शिवधाम, नाथ परंपरा की धरोहर और वैदिक अध्ययन स्थलों को जोड़कर महादेव धार्मिक सर्किट तैयार किया जा रहा है जो श्रद्धालुओं, युवाओं और पर्यटकों सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बने। बदायूं रोड पर बन रहे कांवड़ स्थल को चार करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसमें सरकार की ओर से दो करोड़ रुपये अवमुक्त किये जा चुके हैं। सावन में लाखों शिवभक्तों की भीड़ को देखते हुए यहां विशाल हॉल, पुरुष– महिला परिसर, विश्राम स्थल, और बेहतर सुविधाओं का निर्माण कार्य तेज़ी से जारी है। यह पूरा इलाका धार्मिक पर्यटन का प्रवेश द्वार बनेगा.
वनखंडीनाथ प्राचीन मंदिर भी 582.08 लाख रुपये से धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में उभर रहा है। फ्लोरिस्ट दुकानें और प्रसाद केंद्र के साथ इसका स्वरूप पूरी तरह बदलने जा रहा है।
तपेश्वर नाथ मंदिर भी 836.98 लाख रुपये से मुख्य प्रवेश द्वार, विशाल स्टेज, भंडारा हाल और नए प्रसाद केंद्र के साथ इसे महादेव सर्किट में शामिल किया है।
धोपेश्वर नाथ मंदिर में भी 771.50 लाख रुपये से परिसर में पार्किंग, लाइब्रेरी, फ्लोरिस्ट शॉप और आकर्षक लैंडस्केपिंग के साथ यह स्थान पर्यटक अनुकूल धार्मिक केंद्र बन रहा है।
अलखनाथ मंदिर में भी 1167.40 लाख रुपये से नाथ कॉरिडोर का मुख्य हिस्सा, वैदिक लाइब्रेरी, आस्था पथ, भव्य द्वार और विस्तृत लैंडस्केपिंग के साथ यह बरेली का सर्वाधिक विकसित धार्मिक स्थल बनने जा रहा है।
त्रिवटीनाथ मंदिर में भी 655.65 लाख रुपये से प्रसाद केंद्र, फ्लोरिस्ट शॉप और विशाल सत्संग मंडप के साथ यह स्थल भक्तों की सुविधाओं के लिए एक आदर्श मॉडल बनेगा।तुलसी मठ में भी 971.74 लाख रुपये से यहां वैदिक लाइब्रेरी, मुख्य द्वार, मंच और धर्मशाला के साथ इस स्थल को वैदिक शोध व आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारियाँ चल रही हैं।
पशुपतिनाथ मंदिर में भी 298.93 लाख रुपये से यहाँ के संरचनात्मक कार्यों से इसकी प्राचीनता को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ा जा रहा है। मुख्यद्वार के साथ फोकस वाल का भी निर्माण कराया जा रहा है।
नाथ कारिडोर की परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बरेली में धार्मिक पर्यटकों की संख्या कई गुना बढ़ने का दावा किया जा रहा है जिससे होटल, परिवहन, ट्रैवल, भोजनालय, फूल, प्रसाद और स्थानीय व्यापार में बड़ा उछाल आएगा। हजारों युवाओं के लिए नई रोजगार संभावनाएँ खुलेंगी और बरेली की पहचान एक विकसित नाथ तीर्थ और आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित होगी। वास्तविकता यह है कि नाथ कॉरिडोर का लाभ तब मिलेगा जब तपेश्वर नाथ मंदिर को बीडीए कॉलोनी होकर बदायूं रोड से जोड़ा जाए। अलखनाथ मंदिर को हार्टमेन के पुराने रेल क्रॉसिंग से होकर चंपत राय बगिया होकर अलखनाथ तक रेल पटरी के समानांतर नई सड़क बनाई जाए। जिससे ही नाथ कॉरिडोर की वास्तविकता सार्थक हो पाएगी। और योगी जी का नाथ नगरी का सपना भी धरातल पर आएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि नाथ परंपरा उत्तर भारत की सांस्कृतिक रीढ़ है। नाथनगरी को उसी गरिमा के अनुरूप विकसित किया जाएगा। नाथ कॉरिडोर में चल रहा धीमी गति बाला विकास इसी विज़न का प्रमाण बन रहा है । बरेली शहर के बड़ा बाग हनुमान मंदिर, सीताराम मंदिर संग आंवला स्थित द्रौपदी स्वयंवर स्थल अहिच्छत्र के पर्यटन विकास को स्वीकृति मिल गई है।
हार्टमेन स्कूल के पास बड़ा बाग हनुमान मंदिर में मल्टीपरपज हाल, धर्मशाला, मुख्य द्वार और फुलवारी विकसित करने को 3.55 करोड़ रुपये की परियोजना मंजूर हुई है। श्री राम जानकी मंदिर (सीताराम मंदिर) में 2.96 करोड़ रुपये से पर्यटन विकास के तहत निर्माण कार्य कराए जाएंगे। आंवला स्थित द्रोपदी स्वयंवर स्थल का पर्यटन विकास कराने के लिए 92 लाख रुपये की परियोजना मंजूर हुई है। प्राचीन अहिच्छत्र के समेकित पर्यटन विकास के लिए 2.13 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत हुई है। फरीदपुर के शिव मंदिर पहलऊनाथ के पर्यटन विकास के लिए 99.76
लाख रुपए मंजूर होने की बात कही गई हैं। बरेली विकास प्राधिकरण की रामायण वाटिका में भगवान राम की मूर्ति लगाने का कार्य अंतिम दौर में है। स्मार्ट सिटी में कुष्ठ आश्रम मार्ग, डी डी पुरम की सड़कों को चोड़ा करने की जगह फुटपाथ कई मीटर वाला बना कर एवं ऊंचा कर सड़कों को और संकरा बनाया जा रहा है। जिससे इन सकरी हो रही सड़कों पर जाम लगना आम बात होगी। यही हाल दामोदर स्वरूप पार्क के पास रोटरी बनाकर मुख्य सड़क को संकरा बनाकर केवल सरकारी धन को अनावश्यक रूप से वित्त वर्ष अंत में ही खपाने का काम हो रहा है। निर्भय सक्सेना

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