जब तक देश की आधी आबादी की अनदेखी होती रहेगी तब तक कोई भी देश बिकास और शक्तिशाली दिशा की ओर नहीं जा सकता :- डॉ त्रिवेन्द्र सिंह
उझानी । महिला सशक्तिकरण को प्रदान की नई दिशा और ऊंचाइयां।जब तक देश की आधी आबादी की अनदेखी होती रहेगी तब तक कोई भी देश बिकास और शक्तिशाली दिशा की ओर नहीं जा सकता, भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की इसी विचारधारा से प्रेरणा लेकर नगर के एपीएम पीजी कॉलेज उझानी में राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ त्रिवेन्द्र सिंह द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्यों को किया गया है। डॉ. त्रिवेन्द्र सिंह ने अपने शोध ग्रन्थ में भारतीय महिलाओं के सामाजिक संघर्ष, विकास, राजनीतिक जागरूकता एवं समाज में व्याप्त अनेक प्रकार की समस्याओं के बारे में बताया है। ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें शिक्षा के प्रति, अपने अधिकारों के प्रति , पुरानी रूढ़िवादी परंपराओं के विरोध के प्रति, पर्दा प्रथा, सामूहिक घरेलू हिंसा, महिलाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण आदि अनेक प्रकार की समस्याओं के प्रति महिलाओं को जागरूक करने की दिशा में अनेक सार्थक प्रयास किए गए हैं। डॉ त्रिवेन्द्र सिंह ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में भारीय महिलाओं की वास्तविक स्थिति एवं उनके प्रति होने वाले भेदभाव को अपने व्याख्यान मे प्रस्तुत किया है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में उनके द्वारा किए गए प्रयासों के लिए उन्हें प्रकृति फाउंडेशन मेरठ के द्वारा वर्ष 2024 का राष्ट्रीय शिक्षा गौरव सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया है। आपकी पुस्तक भारतीय महिलाओं में राजनीतिक जागरूकता एवं सामाजिक विकास को वर्ष 2025 की सर्वश्रेष्ठ पत्रिका का पुरस्कार प्रकृति फाउंडेशन मेरठ ने दिया है। अपने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रों में भारतीय महिलाओं के सामाजिक विकास राजनीतिक भूमिका और उनकी स्थिति के महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रस्तुत किया है। आपके इन्हीं कार्यों के लिए सोशल रिसर्च फाऊंडेशन कानपुर द्वारा आपको सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। डॉ. त्रिवेन्द्र सिंह ने अपने साहित्य के माध्यम से महिला सम्मान, आदर, सहयोग, उनके विचारों की सरलता एवं समाज के लिए उनके महत्वपूर्ण रुपों की आवश्यकता को प्रस्तुत किया है। समाज की आधी आबादी के संघर्ष को अपने साहित्य में उनके माध्यम से जिस प्रकार से दर्शाया गया है वह उनके महिला सशक्तिकरण के प्रति सार्थकता पूर्ण उद्देश्य की दिशा में अच्छी पहल है ।













































































