शानो-शौकत के साथ हुआ सदरुल उलामा का क़ुल शरीफ़
बरेली।मज़हर-ए-मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद मुहद्दिसे बरेलवी हज़रत अल्लामा तहसीन रज़ा ख़ाँ अलैहिर्रमा का 19वां उर्स शानो-शौकत से साथ मुकम्मल हुआ। दोपहर 12.30 बजे क़ुल शरीफ़ के बाद सज्जादानशीं हज़रत मौलाना हस्सान रज़ा ख़ाँ नूरी ने ख़ुसूसी दुआ फ़रमाई। उन्होंने मसलक-ए-आला हज़रत पर सख़्ती से क़ायम रहने की ताकीद फ़रमाई। तीन रोज़ा उर्स-ए-तहसीनी की तमाम तक़रीबात सज्जादानशीं मौलाना हस्सान रज़ा ख़ाँ नूरी की सरपरस्ती में हुईं। तीसरे और आख़िरी दिन सुबह “हुस्सामुल हरमैन कॉन्फ्रेंस” शुरू हुई। क़ारी अल्ताफ़ तहसीनी ने कलाम-ए-पाक की तिलावत से कॉन्फ्रेंस का आग़ाज़ किया। इसके बाद अल्लामा ततहीर अहमद साहब और मौलाना इरफ़ान उल हक़ (खटीमा) ने ख़िताब फ़रमाया। जानशीने सदरुल उलामा सूफ़ी रिज़वान रज़ा ख़ाँ ने कहा कि सिर्फ़ ज़बान से “आई लव मुहम्मद” कह देना काफ़ी नहीं है, सही माने में सच्चे दिल से इस पर अमल करके दिखाना है। आख़िर में सज्जादानशीं हज़रत मौलाना हस्सान रज़ा ख़ाँ नूरी की तक़रीर हुई। उन्होंने कहा कि आला हज़रत ने नबी की सच्ची मुहब्बत की वसीयत फ़रमाई है। हमें सख़्ती के साथ मसलक-ए-आला हज़रत का पाबंद रहना है। आख़िर में क़ुल शरीफ़ हुआ और फिर सज्जादानशीं मौलाना हस्सान रज़ा ख़ाँ नूरी ने ख़ुसूसी दुआ फ़रमाई। कॉन्फ्रेंस में आज़म तहसीनी, इश्तयाक़ तहसीनी, शाहरुख़ तहसीनी, मक़सूद तहसीनी, नईम तहसीनी ने नातो-मनक़बत के नज़राने पेश किए। इस मौक़े पर क़ारी तस्लीम रज़ा ख़ाँ साहब, ख़ानक़ाह-ए-तहसीनिया के प्रबंध इंजीनियर सुहेब रज़ा ख़ाँ, नायब सज्जादगान सफ़वान रज़ा ख़ाँ व अमान रज़ा ख़ाँ, दामाद-ए-तहसीने मिल्लत हाजी यूसुफ़ नूरी, नवासा-ए-सदरुल उलामा मौलाना हसन रज़ा ख़ाँ व मुबश्शिर रज़ा ख़ाँ, तनईम रज़ा ख़ाँ, ईकान रज़ा ख़ाँ, अब्दुल्लाह रज़ा क़ादरी, मुअज्ज़म रज़ा खाँ, मुकर्रम रज़ा ख़ाँ मौजूद रहे। उलामा में क़ारी अब्दुर्रहमान, मुफ़्ती अनवारुल हक़, मुफ़्ती ख़ुर्शीद मुस्तफ़ा साहब, मुफ़्ती ख़ुर्शीद मिस्बाही, मुफ़्ती डॉ. शकील मिस्बाही वग़ैरह की मौजूदगी रही। उर्स कमेटी में यामीन तहसीनी, जकी तहसीनी, बबलू खान, काशिफ तहसीनी, फाजिल तहसीनी, मुशाहिद रफत,के अलावा 150 तहसीनी रज़ा कारों ने तमाम ख़िदमात बाख़ूबी अंजाम दीं।













































































