इंडिगो का सबसे बड़ा परिचालन संकट: छह दिन में सैकड़ों उड़ानें रद्द, पायलटों की कमी ने खोली रणनीति की पोल

Screenshot 2025-12-07 190951
WhatsAppImage2024-05-04at205835
previous arrow
next arrow


नई दिल्ली। कभी समय-पालन और बड़े पैमाने पर उड़ानों के लिए जानी जाने वाली देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों अपने इतिहास के सबसे गंभीर परिचालन संकट से जूझ रही है। पिछले छह दिनों में इंडिगो को देशभर में सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। रविवार को ही करीब 650 उड़ानें रद्द हुईं, जिससे हजारों यात्रियों की योजनाएं पटरी से उतर गईं। इस संकट की मुख्य वजह नए पायलट ड्यूटी-टाइम नियमों के तहत जरूरत का गलत आकलन, कर्मचारियों की भारी कमी और न्यूनतम स्टाफ पर अधिकतम विमान उपयोग की रणनीति बताई जा रही है।

ReferralCodeLLVR11
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-06-13at1242061
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2025-06-11at40003PM
previous arrow
next arrow

नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों, कड़ाके की सर्दी और रात की उड़ानों की अधिकता ने इंडिगो की चालक दल (क्रू) व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया। एयरलाइन की नीति हर विमान से अधिकतम उड़ानें लेने और रात की उड़ानों को बढ़ाने पर आधारित थी, लेकिन नए नियमों के चलते कई पायलटों को अनिवार्य विश्राम पर भेजना पड़ा, जिससे शेड्यूल ध्वस्त हो गया।

बीते दिनों हुए इस बड़े पैमाने के व्यवधान का असर पूरे देश में दिखा। महत्वपूर्ण बैठकों, नौकरी के इंटरव्यू और शादियों में शामिल होने वाले यात्री फंस गए। कुछ यात्रियों को आपात चिकित्सा स्थितियों का भी सामना करना पड़ा। घरेलू विमानन बाजार में इंडिगो की करीब 65 फीसदी हिस्सेदारी है, इसलिए इसका सीधा असर हवाई अड्डों पर भीड़, लंबी कतारों और बिखरे सामान के रूप में नजर आया। टर्मिनलों पर नाराज और हताश यात्री दिखाई दिए।

इस बीच विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा लागू किए गए नए एफडीटीएल नियमों का उद्देश्य पायलटों की थकान को कम कर वैश्विक सुरक्षा मानकों के अनुरूप विश्राम सुनिश्चित करना है। इन नियमों में साप्ताहिक विश्राम, रात की उड़ानों की सीमा और लगातार रात्रि ड्यूटी पर सख्त प्रतिबंध शामिल हैं, जिससे पायलट अब पहले की तुलना में कम उड़ानें संचालित कर सकते हैं।

अप्रैल 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने पायलटों के विश्राम नियमों से जुड़े एक दशक पुराने मामले का निपटारा करते हुए सरकार को सीएआर-2024 के प्रावधान समयबद्ध तरीके से लागू करने का निर्देश दिया था। अदालत ने एयरलाइनों को एफडीटीएल योजना तीन सप्ताह के भीतर डीजीसीए को सौंपने को कहा था, ताकि नियम और व्यवहार के बीच संतुलन बन सके।

यहीं इंडिगो की योजना में बड़ी चूक सामने आई। नए नियमों के अनुसार एयरबस ए320 बेड़े के लिए कंपनी को 2,422 कैप्टन की जरूरत थी, जबकि उसके पास केवल 2,357 कैप्टन उपलब्ध थे। फर्स्ट ऑफिसर्स की संख्या भी अपेक्षा से कम रही। ‘लीन स्टाफिंग’ यानी न्यूनतम कर्मचारियों पर निर्भरता की रणनीति पुराने नियमों में तो चल गई, लेकिन नए नियम लागू होते ही अतिरिक्त या रिजर्व पायलट नहीं बचे।

दो दिसंबर को दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई समेत प्रमुख हवाई अड्डों पर 150 से अधिक उड़ानें रद्द होने के साथ संकट खुलकर सामने आ गया। हालात बिगड़ते देख इंडिगो ने तीन दिसंबर को मौसम, तकनीकी कारणों, सर्दियों के शेड्यूल और क्रू नियमों को जिम्मेदार ठहराया और रिफंड व वैकल्पिक यात्रा की घोषणा की।

चार दिसंबर को एयरलाइन ने आधिकारिक तौर पर यात्रियों से माफी मांगी। सीईओ पीटर एल्बर्स ने 10 से 15 दिसंबर तक रद्द उड़ानों के लिए रिफंड, शुल्क माफी, होटल और जमीनी परिवहन की व्यवस्था का ऐलान किया। किराए में बढ़ोतरी की शिकायतों पर सरकार ने छह दिसंबर को हस्तक्षेप करते हुए किराया सीमा का पालन सख्ती से कराने के निर्देश दिए, वहीं डीजीसीए ने इंडिगो प्रबंधन से 24 घंटे में स्पष्टीकरण मांगा।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इंडिगो के बोर्ड चेयरमैन विक्रम सिंह मेहता के नेतृत्व में संकट प्रबंधन समूह गठित किया गया है, जिसमें सीईओ भी शामिल हैं। हालांकि इंडिगो और टाटा समूह की एअर इंडिया मिलकर घरेलू बाजार का 91 फीसदी हिस्सा नियंत्रित करती हैं, ऐसे में सामान्य स्थिति बहाल होने में अभी समय लगना तय माना जा रहा है।

WhatsAppImage2024-10-20at41111PM1
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-04-17at53854PM4
previous arrow
next arrow
Home
Live TV
VIDEO NEWS
Verified by MonsterInsights