इंग्लैंड की संसद में शिप्रा द्वारा गोमती की दिव्यता की परिचर्चा से गोमती को जानने को उत्सुक हुए अंग्रेज
लखनऊ। आज इंग्लैंड में आदि गंगा गोमती की दिव्यता की परिचर्चा कर लखनऊ लौटी वाटर वुमन शिप्रा पाठक का गोमती भक्तों ने 1090 चौराहे पर भव्य स्वागत किया। इसके उपरांत शिप्रा पाठक ने सभी गोमती भक्तों के साथ पूजन किया।
आपको बताते चलें गोमती नदी पीलीभीत जिले से निकलकर कई जनपदों से होकर गाजीपुर के कैथी में गंगा में समा जाती है। शिप्रा पाठक गोमती नदी की 1008 किमी की पदयात्रा करने का गौरव प्राप्त कर चुकीं हैं। किसी भारतीय मातृ शक्ति के द्वारा गोमती नदी की यह पहली पदयात्रा है।शिप्रा ने अपनी गोमती नदी की पदयात्रा से संबंधित अनुभवों को गोमती प्राक्कलन समिति उत्तर प्रदेश में आमंत्रित किए जाने पर साझा किया था।

इस दौरान शिप्रा पाठक ने कहा कि आदि गंगा गोमती का महत्व लखनऊ के लोगों को समझना चाहिए।उन्होंने कहा हर दायित्व सरकार का नही है कुछ हम लोगों का भी है।उन्होंने कहा कि गोमती नदी के 1008 किमी लंबे किनारों पर अतिप्राचीन शिवालय स्थापित है।उन्होंने कहा जब मैंने इसकी चर्चा लंदन में की तो हर कोई यहां आकर दर्शन करने को उत्सुक दिखा। ऐसे में जब सात समंदर पार से हमारे देश की धरोहर को देखने कोई आए तो हमें उसे स्वच्छ रखने का प्रयास करना चाहिए।इसके साथ गोमती नदी की आरती भी सभी गोमती भक्तों ने की।गोमती नदी की 1008 किमी की पद यात्रा करने के उपरांत शिप्रा ने विश्व स्तर पर गोमती की दिव्यता को ले जाने का बीड़ा उठाया है लंदन में अपनी महाकुंभ पुस्तक के विमोचन के बाद शिप्रा ने गोमती नदी के दर्शन हेतु वहां के एक प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया है।शीघ्र ही वहां से लोग गोमती नदी एवं यहां स्थित अतिप्राचीन शिवालय के दर्शन हेतु यहां आयेंगे। अमित सिंह,राजन मिश्रा,अंकुर सिंह, सुरेश गुप्ता,वंदना गुप्ता,महावीर गौर, अजय त्रिवेदी अनुभव वर्मा,इंद्र मिश्रा,कृष्ण शुक्ला,पंकज दीक्षित,विशाल विक्रम सिंह,धीरेन्द्र सिंह समेत सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम के उपरान्त शिप्रा पाठक ने सिंदूर का पौधा भी रोपित किया।













































































