बच्चों में ल्यूकेमिया के शुरुआती पहचान से मिलती है नई उम्मीद
बरेली । बचपन खेल, सीखने और सपनों से भरा होना चाहिए, लेकिन कुछ परिवारों के लिए ज़िंदगी तब अप्रत्याशित मोड़ ले लेती है जब बच्चे को ल्यूकेमिया (खून का कैंसर) जैसी बीमारी का पता चलता है। यह बच्चों में सबसे आम तरह का कैंसर है। “कैंसर” शब्द डरावना लगता है, लेकिन आज इलाज में आई तरक्की ने नई उम्मीद दी है। शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर अधिकांश बच्चे सफलतापूर्वक इलाज पा सकते हैं। ल्यूकेमिया खून और बोन मैरो का कैंसर है। इसमें असामान्य वाइट ब्लड सेल्स तेजी से बढ़ती हैं, जिससे स्वस्थ सेल्स के लिए जगह कम हो जाती है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो जाती है और स्वास्थ्य प्रभावित होता है। बच्चों में इसके दो प्रमुख प्रकार पाए जाते हैं – एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ALL), जो सबसे आम और इलाज योग्य है, और एक्यूट मायलॉयड ल्यूकेमिया (AML), जो कम पाया जाता है लेकिन इसमें गहन इलाज की आवश्यकता होती है। मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के कैंसर केयर विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. रयाज़ अहमद ने बताया कि “ल्यूकेमिया की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे दिखते हैं, जिससे पहचान में देर हो जाती है। माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए यदि बच्चे को बार-बार बुखार या संक्रमण हो, बिना कारण चोट के निशान या खून आना, लगातार थकान, हड्डियों या जोड़ों में दर्द, लिम्फ नोड्स या पेट में सूजन, या फिर असामान्य रूप से पीली त्वचा दिखे। इन चेतावनी संकेतों पर समय रहते ध्यान देना और तुरंत कदम उठाना इलाज के परिणामों में बड़ा फर्क डाल सकता है।“ डॉ. रयाज़ ने आगे बताया कि “निदान के लिए खून की जांच, बोन मैरो परीक्षण और कभी-कभी जेनेटिक स्टडी की जाती है, जिससे ल्यूकेमिया का प्रकार और अवस्था स्पष्ट होती है। इसके बाद बच्चे की ज़रूरतों के अनुसार इलाज की योजना बनाई जाती है। कीमोथेरेपी इसका मुख्य आधार है, जिसे चरणबद्ध तरीके से दिया जाता है। इसके अलावा, आजकल टारगेटेड थेरेपी भी उपलब्ध है, जो सीधे कैंसर कोशिकाओं पर असर करती है और दुष्प्रभाव को कम करती है। उच्च जोखिम वाले या दोबारा उभरने वाले मामलों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सलाह दी जा सकती है। साथ ही पोषण, संक्रमण की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य जैसी सपोर्टिव केयर रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।“ ल्यूकेमिया से गुजरने की यात्रा सिर्फ चिकित्सा तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें मानसिक मजबूती भी अहम होती है। परिवार का प्रोत्साहन और सकारात्मकता बच्चे के लिए बेहद सहायक होते हैं। अब अस्पतालों में काउंसलिंग और ग्रुप सेशन्स जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं, जिससे बच्चों और उनके माता-पिता को मानसिक सहारा मिलता है। बच्चों में ल्यूकेमिया गंभीर बीमारी है, लेकिन आज यह पहले की तुलना में कहीं अधिक नियंत्रण योग्य है। समय रहते पहचान, आधुनिक इलाज और समग्र देखभाल से अधिकांश बच्चों के ठीक होने की संभावना बहुत अधिक है। सबसे ज़रूरी है जागरूकता। माता-पिता को लगातार बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और बिना देरी डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। क्योंकि जब ल्यूकेमिया समय पर पकड़ा जाता है, तो यह केवल इलाज योग्य ही नहीं बल्कि हराने योग्य बीमारी भी है।













































































