बरेली। दस लक्षण पर्व का विधिवत समापन जैन मंदिरों में किया गया, प्रातः पांडुशिला पर श्री जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक, प्रक्षाल के उपरांत नित्य नियम पूजा तथा मां जिनवाणी अर्थात मां सरस्वती पूजन के बाद शांति विधान किया गया। दस लक्षण पर्व कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी सौरभ जैन ने बताया कि क्षमा वाणी पर्व की शुरूआत हो गई है, 9 सितंबर दिन मंगलवार को जैन मंदिर, रामपुर गार्डन में दोपहर डेढ़ बजे से क्षमा वाणी पर्व मनाया जाएगा, जिसमें श्री जिनेंद्र भगवान की पालकी यात्रा निकाली जाएगी, भगवान के अभिषेक के उपरांत तमाम क्षेत्रो से संबंधित सम्मान कार्यक्रम होंगे। उन्होंने बताया कि दस लक्षण पर्व में 10 दिनों में कर्म निर्जरा के लिए जैन धर्मावलंबी कड़ा तप करते हैं, जिसमें जमीकंद (जमीन के नीचे उगी सब्जियां), रात्रि भोजन का त्याग, कुछ लोग साबुन, तेल, दाढ़ी, बाल बनवाने का त्याग भी कर देते हैं। जैन धर्मावलंबी अन्य जीवोपार्जन के कार्यों से विश्राम ले कर धर्म ध्यान, स्वाध्याय, पूजन, गुरुओं की सेवा के कार्यों में लगते हैं, मुनि महाराजों के द्वारा 10 दिन का धर्म साधना का प्रशिक्षण शिविर संपूर्ण भारत में आयोजित किए जाते हैं, वर्तमान में आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज जी के सानिध्य में अहिक्षेत्र रामनगर में चल रहा शिविर कल समाप्त हुआ। बरेली में जहां रूपाली जैन द्वारा 10 दिनों में एक समय केवल मुनक्के के जल ले कर व्रत किए गए, वही पूजा जैन ने 10 दिन एक समय केवल ड्राइ फ्रूटस दूध के साथ लिया। सौम्या जैन पुत्री सुभाष जैन ने तेला(तीन दिन का उपवास) किया, तो अभिषेक जैन और उनके पिता सतेंद्र जैन निवासी चाहबाई ने पहले और अंतिम दिवस निर्जल व्रत किए।जैन समाज के बच्चे और बच्चियों ने भी 10 दिन एकासन किए।जैन समाज ने सभी धर्मावलंबियों के तप की खूब खूब अनुमोदना की है।