बरेली जीआरपी थाने में चली गोली, इंस्पेक्टर और सिपाही घायल, चार पुलिसकर्मी निलंबित
बरेली। बरेली जंक्शन के जीआरपी थाने में 2 सितंबर की रात उस समय अफरा-तफरी मच गई जब ड्यूटी चेंज के दौरान अचानक गोलियों की आवाज गूंजी। इस घटना में थाना प्रभारी इंस्पेक्टर परवेज अली खान और सिपाही छोटू कुमार घायल हो गए। हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर घटना की जानकारी पुलिस अधिकारियों तक दो दिन बाद यानी 4 सितंबर को पहुंची। वह भी तब, जब सीओ जीआरपी अनिल कुमार वर्मा प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए बरेली पहुंचे।
सीओ वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ड्यूटी पर पद्मावत एक्सप्रेस जाने के लिए सिपाही को पिस्तौल दी जा रही थी। इसी दौरान मैगजीन लोड करते वक्त गलती से ट्रिगर दब गया और गोली चल गई। घबराकर सिपाही ने पिस्तौल नीचे फेंक दी। तभी इंस्पेक्टर परवेज अली खान बाहर निकल आए और मौके पर मौजूद मुंशी ने हथियार संभालने का प्रयास किया। लेकिन लापरवाही के चलते पिस्तौल पूरी तरह अनलॉक नहीं की गई और हैमर को उंगली से रिलीज करने की कोशिश में दूसरी बार फायर हो गया। इस गोली का एक हिस्सा सिपाही छोटू कुमार की भौंह पर और दूसरा हिस्सा इंस्पेक्टर परवेज अली खान की नाक पर जा लगा। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, हालांकि उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि 2 सितंबर को हुई इस घटना को 4 सितंबर तक दबाकर रखा गया। जब मामला सामने आया तो पुलिस अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर परवेज अली खान, कांस्टेबल छोटू कुमार, मनोज कुमार और मोनू को निलंबित कर दिया। जांच की जिम्मेदारी सीओ गाजियाबाद को सौंपी गई है।
फिलहाल जांच इस बात पर भी की जा रही है कि गोली एक पिस्तौल से चली या दो पिस्तौलों से। संदेह यह भी है कि गोली एक चली या दो चली। वहीं पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि यह महज हादसा था या किसी सोची-समझी साजिश के तहत गोली चलाई गई।
सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि यह लापरवाही थाने में न होकर पद्मावत एक्सप्रेस जैसी भीड़भाड़ वाली ट्रेन में होती तो यात्री भी इसकी चपेट में आ सकते थे। इस घटना ने न केवल जीआरपी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।













































































