जश्ने ईद मिलाद उल नबी केे मुबारक महीने में मुशायरा हुआ
बरेली।।जश्ने ईद मिलाद उल नबी केे मुबारक महीने में आस्ताना ए आलिया मोहम्मदीया(दरगाह वली मियां) में बाद नमाज़ इशा तरहई नातिया मुशायरा हुआ, मिसरा तरह “मरहबा मुस्तफ़ा मरहबा मुज्तबा,पढ़ते क़ुदसी ये सल्ले अला आ गए” पर शोरा हज़रात अपने कलाम पढ़ कर अक़ीदत का नज़राना पेश किया । प्रोग्राम का आग़ाज़ कारी गु़लाम यासीन ने कलाम ए पाक की तिलावत से किया, सज्जादानशीं अल्हाज अनवर मियाँ हुज़ूर ने “फ़ैज़ तेरा रहे हमपे जारी सदा, हो निगाहे करम हमपे प्यारी सदा, तुमसे उल्फत रहे यूं हमारी सदा करने दरपे तेरे यह दुआ आ गए” पढ़कर मुशायरे की शुरुआत की। प्रोग्राम की निज़ामत कर रहे हिलाल बदायूंनी ने “उनकी आमद पे कहने लगा हर बशर देखो देखो हबीबे खुदा आ गए यानी महबूबे रब्बुल उला आ गए , आ गए आ गए मुस्तफा आ गए” पढ़कर शोअरा हज़रात को दावत देकर मुशायरे को आगे बढ़ाया नवाब अख्तर मोहनपुरी ने ” ऐसा मंज़र किसी ने न देखा कभी रब का पैग़ाम लायें हैं रूहुल अमी, अब निजाम ए ज़माना बदल जाएगा ख़ास महबूब ए रब्बुल उल उला आ गए” कलाम पढ़ कर अक़ीदत का नज़राना पेश किया। मोइन नवाबगंजवी ने “अतक़िया आ गए, असफ़िया आ गए, ग़ौसो अबदाल सब औलिया आ गए बज़्मे नाते नबी जब सजाई गई नात सुनने सभी अंबिया आ गए” पढ़ा। डा. अमन बरेलवी ने “छट गई ज़ुल्मते कुफ्र की हर घटा वह सरा पा लिए नूर का आ गए ,हर तरफ नूर का दौर दौरा हुआ बज़्मे इमकाँ में खैरुल वरा आ गए” पढ़कर वाह वाह लूटी।
“कुफ़्रे ज़ुल्मत तजल्ली से टुकड़े हुआ आप के नूर से जब सवेरा हुआ
ज़िंदगी को नयी ज़िंदगी मिल गई जब ज़मीं पर हबीबे ख़ुदा आ गए”
इंतिखाब संभली के इस शेर पर खूब दाद मिली,
शाहबाद से आये गुल मोहम्मद क़दीरी ” नफ़्सी नफ़्सी जहां अम्बिया ने कहा, फिर अचानक वहाँ गूँजी एक सदा, बक्शवाने को महशर के मैदान में आसीयों अब शफ़ीक उल वर आ गए” पढ़ा, शमशाद अलीनगरी ने”आये जिब्रील जब अर्श से फ़र्श पर चेहरए मुस्तफ़ा पर पड़ी जब नज़र, देख कर मुस्तफा को ये कहने लगे वाह क्या हुस्न की इंतिहा आ गए” पढ़ा।
मुफ्ती सगीर अख़्तर,हयात बरेलवी,शाद पीलीभीती, दुलारे फ़ारूकी आदि शोअरा हज़रात ने अपने कलाम पेश किए। प्रोग्राम के बाद सलात व सलाम के बाद सज्जादानशीं अल्हाज अनवर मियाँ हुज़ूर ने दुआ ए ख़ैर फ़रमाई, इस मौके पर सय्यद नाज़िर अली(चाँद), हाजी आरिफ़ उल्लाह,इफ़्तिखार हुसैन,ताहिर जमाल, हाफ़िज़ फ़ाज़िल, शराफत, फ़ैज़ी, अब्दुल जब्बार, अब्दुल कय्यूम, हाफ़िज़ जानिसार, समीर,शाहिद हुसैन, कैफ़ी उल्लाह ,इलियास,सय्यद मुस्तजाब अली,अहमद हुसैन मौजूद रहे।













































































