बदायूं में रक्षाबंधन पर प्राइवेट बस स्टैंड पर भीड़ कम, रोडवेज की फ्री सेवा और डग्गामार वाहनों से नुकसान

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बदायूं। रक्षाबंधन के अवसर पर जहां शहर भर में बाजारों और मिठाई की दुकानों पर दिनभर रौनक रही, वहीं प्राइवेट बस स्टैंड पर इस बार अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी। गत वर्षों की तुलना में यात्रियों की संख्या में स्पष्ट कमी देखने को मिली। सुबह के समय कुछ हद तक हलचल रही, लेकिन दोपहर बाद स्टैंड लगभग सुनसान नजर आने लगा। बस ऑपरेटरों और स्थानीय जानकारों का मानना है कि इस स्थिति के पीछे दो मुख्य कारण रहे। पहला, प्रदेश सरकार की ओर से रक्षाबंधन पर महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा। इस योजना का सीधा असर प्राइवेट बसों की सवारियों पर पड़ा, क्योंकि बड़ी संख्या में महिला यात्री अपनी यात्रा के लिए रोडवेज बसों को प्राथमिकता देती दिखीं। दूसरा बड़ा कारण डग्गामार वाहनों की बेतहाशा मौजूदगी रही। रक्षाबंधन के दिन शहर और आसपास के ग्रामीण मार्गों पर दर्जनों निजी और अवैध वाहन बेखौफ ओवरलोड होकर दौड़ते नजर आए। ये वाहन बिना तय किराया व्यवस्था और बिना किसी समय सारणी के कम दाम पर यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने का दावा करते हैं, जिससे यात्रियों का रुझान इनकी ओर बढ़ जाता है। प्राइवेट बस मालिकों का कहना है कि डग्गामार वाहनों पर रोकथाम न होने से उनकी आय पर लगातार असर पड़ रहा है। खासकर त्यौहार के दिनों में, जब उन्हें यात्रियों से अच्छी आय की उम्मीद होती है, अवैध वाहन उनकी कमाई छीन लेते हैं। रक्षाबंधन जैसे अवसर पर, जब शहर में आमतौर पर यातायात का दबाव अधिक रहता है, तब इस तरह की स्थिति उनके लिए नुकसानदेह साबित होती है। दोपहर बाद प्राइवेट बस स्टैंड पर खड़े चालक और परिचालक समय काटते नजर आए। कई बसें घंटों तक सवारियों का इंतजार करती रहीं, लेकिन पर्याप्त यात्री न मिलने पर खाली ही लौटनी पड़ीं। यात्रियों की कमी से न केवल बस मालिकों को घाटा हुआ बल्कि ड्राइवर और कंडक्टर की रोज़मर्रा की आय पर भी सीधा असर पड़ा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि डग्गामार वाहन यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं, ओवरलोडिंग से यात्रियों की जान खतरे में डालते हैं और सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इसके बावजूद इन पर कार्रवाई न होना प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। वहीं रोडवेज की फ्री सेवा को लेकर उनका मानना है कि यह सुविधा भले ही महिलाओं के लिए लाभकारी है, लेकिन इसका असर निजी परिवहन व्यवसाय पर साफ दिखाई दे रहा है। त्यौहार के इस मौके पर जहां रोडवेज बस स्टैंड पर लंबी कतारें लगी रहीं और बसें खचाखच भरी हुई रवाना होती रहीं, वहीं प्राइवेट बस स्टैंड पर यात्री गिनती के बराबर थे। यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि परिवहन के सरकारी और अवैध विकल्पों के बीच प्राइवेट बस ऑपरेटरों की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। बस मालिकों ने प्रशासन से मांग की है कि डग्गामार वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए और त्यौहारों पर उनकी गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाए, ताकि सभी परिवहन साधनों को समान अवसर मिल सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

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