प्रदेश सरकार बाल श्रमिकों को शिक्षा से जोड़कर, उनका कर रही है विकास

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बदायूँ। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश से बालश्रम उन्मूलन के लिए विशेष कार्य किये गये है। प्रदेश सरकार बालश्रमिकों को चिन्हित कर शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ रही है। प्रदेश में संचालित विभिन्न योजनाओं से उन्हें लाभान्वित किया जा रहा है। बाल श्रमिक विद्या योजना- प्रदेश में संचालित इस योजना के अन्तर्गत ऐसे बाल श्रमिकों जिनके माता पिता की मृत्यु हो चुकी है अथवा वे किसी गंभीर रोग से ग्रस्त होने के कारण कार्य करने की स्थिति में नहीं है। ऐसे कामकाजी बच्चों के लिए आर्थिक सहायता की धनराशि प्रत्येक माह रु0-1000/-बालकों के लिए व रू0 1200/- बालिकाओं के लिए दी जाती है। लाभार्थी कामकाजी बालक/बालिका व किशोर/किशोरी योजना के अन्तर्गत कक्षा-8, 9, एवं 10 तक शिक्षा प्राप्त करते है तो उन्हें कक्षा-8 उत्तीर्ण करने पर रू0 6000/-की अतिरिक्त धनराशि प्रोत्साहन के रूप में दी जा रही है। इस योजना के अन्तर्गत प्रति वर्ष 8-18 आयु वर्ग के 2000 कामकाजी बच्चों/किशोर-किशोरियों को लाभान्वित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस योजना के अन्तर्गत रू0 3.00 करोड़ आवंटित किए गए हैं। जिससे पात्र बालक/बलिकाओं की शिक्षा पर व्यय किया जा रहा है। बाल श्रम सर्वेक्षण योजना- बाल श्रम समस्या का आंकलन कराने हेतु बाल श्रम सर्वेक्षण कराया जा रहा है, जिसमे 09-14 आयु वर्ग के खतरनाक व्यवसायों/प्रक्रियाओं में चिन्हांकित बाल श्रमिकों के शैक्षिक पुनर्वासन हेतु राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के अन्तर्गत प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त करने की योजना राज्य सेक्टर से स्वीकृत की गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस योजना के अन्तर्गत धनराशि रू0 5.00 लाख आवंटित किया गया है। जिससे सर्वेक्षण कार्य कराया जा रहा है। नया सवेरा योजना- नया सवेरा योजना के अन्तर्गत यूनीसेफ के सहयोग से प्रदेश के बाल श्रम से सर्वाधिक प्रभावित 20 जिलों के चिन्हित 1197 ग्राम पंचायतों/शहरी वार्डों को बाल श्रम मुक्त घोषित किया जाना है। योजना में 20 जिलों के 1197 ग्राम पंचायतों/शहरी वार्डों में संचालित नया सवेरा योजना के अन्तर्गत अब तक कुल 1197 ग्राम व वार्डों का सर्वेक्षण पूर्ण कराकर 6-14 आयु वर्ग के 41285 कामकाजी बच्चों को चिन्हित किया गया है, जिसके सापेक्ष 33405 बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में प्रवेशित/नियमित कराया गया है। इसी प्रकार 15-18 आयु वर्ग के 14825 कामकाजी बच्चों/किशोर-किशोरियों को चिन्हित किया गया है तथा उन्हें व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में जोड़े जाने की कार्यवाही की जा रही है। नया सवेरा योजना के अन्तर्गत चिन्हित कामकाजी बच्चों/किशोर किशोरियों के 14825 परिवारों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजना से भी आच्छादित कराया गया है। अब तक 623 हॉट स्पाट (ग्राम पंचायतों/शहरी वार्डों) को बाल श्रम मुक्त घोषित किया जा चुकी है। बन्धुआ श्रम पुनर्वासन योजना, 2016- श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 17 मई 2016 के उपरान्त पूर्व में संचालित बंधुआ श्रम पुनर्वासन योजना को संशोधित कर दिया गया हैं। इस योजना के अन्तर्गत बंधुआ श्रम प्रकरणों में समरी ट्रायल पूर्ण होने के उपरान्त पुनर्वासन हेतु क्रमशः धनराशि रू0 1.00 लाख, 2.00 लाख व 03.00 लाख दिये जाने की व्यवस्था की गई है, जोकि पूर्ण रूप से श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भुगतान किया जाता है। इसके अतिरिक्त पुनरीक्षित योजना में अवमुक्त बंधुआ श्रमिक को तात्कालिक सहायता के रूप में धनराशि रू0 30,000/- का भुगतान किया जाता है। इस हेतु राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी के स्तर पर धनराशि रू0 10.00 लाख कार्पस निधि की व्यवस्था प्रत्येक जिले में की जा चुकी है।

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