बदायूँ। विद्या भारती से संबद्ध शिव देवी सरस्वती शिशु मन्दिर में महर्षि वेदव्यास जयंती के उपलक्ष्य में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती की वंदना एवं महर्षि वेदव्यास के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। कार्यक्रम के अध्यक्ष लालाराम वर्मा, मुख्य वक्ता राकेश कुमार मिश्रा तथा प्रधानाचार्य सुशील कुमार ने महर्षि वेदव्यास के चित्र पर संयुक्त रूप से पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं वैभव, माधव, नंदिनी, मोनिका, संगीता, रुद्र दीक्षित, दिव्यांशी, वेदिका राठौर सहित अनेक भैया-बहिनों ने महर्षि वेदव्यास के जीवन, कृतित्व एवं गुरु के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।मुख्य वक्ता राकेश कुमार मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा कि महर्षि वेदव्यास भारतीय संस्कृति के महान ऋषि एवं महाभारत जैसे अमर ग्रंथ के रचयिता थे। उन्होंने कहा कि "गुरु का स्थान भगवान से भी बढ़कर होता है, क्योंकि ईश्वर की प्राप्ति भी गुरु के मार्गदर्शन से ही संभव होती है।" गुरु ही मनुष्य के जीवन को सही दिशा देकर उसे ज्ञान, संस्कार और सफलता के पथ पर अग्रसर करता है।विद्यालय के प्रधानाचार्य सुशील कुमार ने कहा कि गुरु के बिना जीवन अधूरा है। व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण, चरित्र विकास एवं उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में गुरु की भूमिका सर्वोपरि होती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लालाराम वर्मा ने आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि गुरु गुणों की अमूल्य खान हैं। वे स्वयं तपकर अपने शिष्यों के जीवन को प्रकाशमान बनाते हैं तथा सदैव उनके कल्याण के लिए समर्पित रहते हैं।कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ एवं शिशु भारती प्रमुख आचार्य कौशल किशोर पाठक ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के आचार्य भोलेनाथ पाठक, रूपेन्द्र सिंह, नरेश पाल सिंह, सुबोध मिश्रा, अविलेश यादव, राजीव सिंह, निरंजन सिंह, राहुल शर्मा, देवेन्द्र कुमार, पूजा शर्मा, ज्योत्सना सिंह, कंचन गुप्ता, रिया राजपूत, कु. आयुषी, अंचल पाठक, सुमन शर्मा, प्रियंका सिंह सहित समस्त आचार्यगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।