बरेली। चांद की 6 तारीख़ हिन्दुस्तान की मशहूर और मारूफ खानकाहे आलिया नियाजिया से शाम को 4 बजे इमाम ए हुसैन अलैहिस्सलाम की याद मैं मोहर्रम का बड़ा जुलूस खानकाहे आलिया नियाजिया के सज्जादा नशीन अल्हाज मेंहदी मियां साहब किब्ला ने खानकाह के मैनेजर जुनैदी मियां नियाज़ी की दस्तार बांध कर उनकी सरपरस्ती में खानकाह की हवेली के दरवाजे से जुलूस को रवाना किया। इस मौके पर सभी सहबजादगान और दूर से आए हुए मुरीदीन और आस पास के जिले से आए हुए इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से मुहब्बत करने वाले तमाम शहदाई शामिल हुए खानकाह की जारी शरीफ (रोज़ा ए इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम) के अलावा सके पीछे दीगर छोटे बड़े ताज़िए तखत अलम शरीफ शामिल हुए और 8 बजे खानकाह के पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी गेट से इस दौरआन लंगर और सबील का सिलसिला जारी रहा और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के नाम का लंगर लुटाया गया। सुबह से ही खानकाह के आस पास जुलूस में शामिल होने के लिए हजारों की तादाद में भीड़ इक्कठा होना शुरू हुई लंगर को हासिल करने के बाद सब जुलूस में शामिल हुए ये जुलूस बड़े अदबो एहतराम के साथ अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ जुलूस निकला और रास्तों मैं या हुसैन की सदायें गूंजी ठीक 12 बजे कटरा मानराय में जुलूस के पहुंचने पर यहां पर लोगों ने जुलूस का इस्तकबाल किया 1 बजे बंखाना, चौधरी तालाब, राजा चोक, रात को 3 बजे गोस्यान मस्जिद से आगे गाड़ी पर जुलूस ठहर गया। अगले दिन 3 जुलाई सुबह 8 बजे वापसी अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ शाम 6 बजे या हुसैन के नारे की सदाओं के साथ खानकाह मैं पहुंचा। और पुलिस प्रशासन और शहर की सोशल तंजीमों का विशेष योगदान रहा।