बरेली में भूमाफियाओं की दबंगई: प्लॉट पर अवैध कब्जे और धमकियों का आरोप
बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में भूमाफियाओं की दबंगई का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां अमित अग्रवाल नामक व्यक्ति ने अपने प्लॉट पर अवैध कब्जे और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने अपर पुलिस महानिदेशक, बरेली को एक लिखकर न्याय की गुहार लगाई है, जिसमें उन्होंने स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। यह मामला न केवल व्यक्तिगत संपत्ति के हनन का है, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अमित अग्रवाल, जो मोहल्ला साहूकारा, थाना फतेहगंज पश्चिमी के निवासी हैं, उन्होंने अपने पत्र में बताया कि उन्होंने गुलमोहर पार्क, राजेंद्र नगर में खसरा नंबर 97 डी के अंतर्गत प्लॉट नंबर 3 और 4, दोनों 180.60 वर्गमीटर, क्रमशः 5 अप्रैल 2024 और 19 जनवरी 2024 को रजिस्टर्ड बैनामे के जरिए खरीदे थे। इन प्लॉटों पर निर्माण के लिए उन्होंने बैंक से ऋण स्वीकृति भी प्राप्त की थी। लेकिन 24 मई 2025 को जब वह अपने प्लॉट पर पहुंचे, तो पाया कि विशाल चौधरी, विभूति सिंह यादव, विक्रम यादव, बलवंत सिंह उर्फ बंटी, राजेंद्र सिंह और तरुण त्यागी ने अवैध रूप से निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। विरोध करने पर इन लोगों ने अमित को मां-बहन की गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित ने तुरंत डायल 112 पर शिकायत दर्ज की, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवाया और आरोपियों को थाना प्रेमनगर ले गई। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अगले ही दिन, 25 मई 2025 को, थाना प्रेमनगर पुलिस की मौजूदगी में आरोपियों ने फिर से निर्माण कार्य शुरू कर दिया। अमित का आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत से यह अवैध कब्जा हो रहा है। पीड़ित ने यह भी बताया कि उक्त लोग उनके प्लॉट को खसरा नंबर 93 डी और 95 डी का बताकर जबरन कब्जा कर रहे हैं। इस मामले में दो मुकदमे, मूलवाद संख्या 357/2025 और 258/2025, बरेली की एसीजेएम 7 कोर्ट में विचाराधीन हैं। अमित ने अपर पुलिस महानिदेशक से अनुरोध किया है कि उनके प्लॉट को कब्जामुक्त कराया जाए और आरोपियों के खिलाफ कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। इस पत्र को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा किया गया है, जिसके बाद पुलिस अधिकारियों ने थाना प्रेमनगर को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह मामला बरेली में भूमाफियाओं की बढ़ती दबंगई और प्रशासनिक निष्क्रियता को उजागर करता है, जिस पर आमजन की निगाहें टिकी हैं।













































































