शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर हिंदू धर्मगुरु पंडित सुशील पाठक का हमला

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बरेली। हिंदू धर्मगुरु पंडित सुशील पाठक ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साध रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह कांग्रेस के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे हैं। पंडित सुशील पाठक ने कहा कि एक धर्मगुरु को राजनीति से ऊपर रहना चाहिए, लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद जिस तरह से सरकार पर हमले कर रहे हैं, वह उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि अगर शंकराचार्य को लगातार सरकार के खिलाफ ही बोलना है, तो उन्हें अपने धर्मगुरु का चोला छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए।

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महाकुंभ की व्यवस्था पर सवाल उठाना गलत

महाकुंभ 2025 को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं पर बोलते हुए पंडित सुशील पाठक ने कहा कि सरकार ने अब तक बेहतरीन इंतजाम किए हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रयागराज में हुई भगदड़ की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसके लिए पूरी तरह से सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा, “शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जब भी बोलते हैं, तो सरकार के खिलाफ ही बोलते हैं। जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ था, तब भी उन्होंने सवाल खड़े किए थे, और अब कुंभ में हुई भगदड़ को लेकर भी वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस्तीफा मांग रहे हैं। यह दिखाता है कि उनकी मंशा केवल सरकार पर निशाना साधने की है, न कि किसी समाधान की तलाश करने की।”

राजनीति करनी है तो कांग्रेस में शामिल हों

पंडित सुशील पाठक ने कहा कि अगर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को राजनीति ही करनी है, तो उन्हें संन्यासी का चोला उतारकर सीधे कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “शंकराचार्य का पद बहुत सम्मानजनक होता है, लेकिन अगर वह लगातार किसी राजनीतिक दल की भाषा बोलेंगे और सरकार के खिलाफ ही बयानबाजी करेंगे, तो उनकी छवि को नुकसान पहुंचेगा।

उन्होंने कहा कि धर्मगुरु का काम समाज को जोड़ना होता है, न कि राजनीति करना। यदि किसी को सरकार की नीतियों से असहमति है, तो उसे उचित मंच पर अपनी बात रखनी चाहिए, न कि केवल एक पक्ष के खिलाफ बयानबाजी करनी चाहिए।

राम मंदिर पर भी उठा चुके हैं सवाल

पंडित सुशील पाठक ने याद दिलाया कि जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा था, तब भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के लिए राम मंदिर एक ऐतिहासिक क्षण था, लेकिन उस समय भी उन्होंने आलोचना करके लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी।

उन्होंने कहा, “अब जब प्रयागराज में कुंभ की तैयारियां जोरों पर हैं, तब भी वह सरकार की आलोचना कर रहे हैं। यह दिखाता है कि उनकी मानसिकता सरकार विरोधी है। धर्मगुरु को निष्पक्ष रहकर समाज का मार्गदर्शन करना चाहिए, न कि राजनीतिक एजेंडा चलाना चाहिए।”

शंकराचार्य का पद राजनीति से ऊपर रहना चाहिए’

पंडित सुशील पाठक ने अंत में कहा कि शंकराचार्य का पद राजनीति से ऊपर होना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें धर्म और राजनीति को अलग रखना चाहिए। अगर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को सरकार की नीतियों से इतनी ही आपत्ति है, तो उन्हें खुलकर कांग्रेस में शामिल होकर चुनाव लड़ना चाहिए। उन्हें हिंदू समाज के धार्मिक नेतृत्व की छवि को धूमिल नहीं करना चाहिए।”

उन्होंने हिंदू समाज से अपील की कि वे ऐसे बयानों से गुमराह न हों और धर्मगुरुओं से अपेक्षा करें कि वे समाज को सही दिशा में मार्गदर्शन करें, न कि राजनीतिक बहस में उलझें।

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