डीएम की अध्यक्षता में हुई नमामि गंगे की बैठक

PHOTO-4-1
WhatsAppImage2024-05-04at205835
previous arrow
next arrow

बदायूँ। गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने, किसानों के कृषि उत्पादन की लागत को कम करने आदि विभिन्न उद्देश्यों के साथ संचालित नमामि गंगे जैविक खेती परियोजना यूपी डास्प के अन्तर्गत द्वितीय चरण हेतु जिला स्तरीय शासी निकाय की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी निधि श्रीवास्तव ने जैविक खेती से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि जैविक खेती करने वाले किसानों को दिए जाने वाले सामान व अन्य प्रकार के इंसेंटिव समय से उपलब्ध हो यह सुनिश्चित किया जाए। कलेक्ट्रेट स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि जैविक खेती से कृषि उत्पादकता बढ़ती है व मृदा शक्ति में भी बढ़ोत्तरी होती है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती से बनने वाले उत्पादों का प्रमाणीकरण समय से कराया जाए। उन्होंने कहा कि रीजनल काउंसलर ग्रामों का दौरा कर किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करें। उप कृषि निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि गंगा किनारे के 5 से 7 किलोमीटर के दायरे में आने वाले ग्रामों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए योजना संचालित है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में योजना का द्वितीय चरण संचालित है। प्रथम चरण में 67 ग्रामों में कार्य कराया गया तथा वर्तमान में द्वितीय चरण में 71 गंगा किनारे के ग्रामों में कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जनपद के पांच ब्लाकों जिसमें उसावां, दहगवां, सहसवान, उझानी व कादरचौक में यह कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नमामि गंगे के लिए राज्य स्तर से सात कृषि उत्पादक संघ (एफपीओ) तथा केंद्र स्तर से जैविक खेती के लिए चार कृषि उत्पादक संघ बनाए गए हैं। एक कृषि उत्पादक संघ में करीब 1000 किसानों को जोड़ा गया हैंं। उन्होंने बताया कि जैविक खेती में किसानों को फर्टिलाइजर, केमिकल का उपयोग न करके गाय का गोबर, गोमूत्र, बीज शोधन प्रक्रिया अपनाने आदि के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। नमामि गंगे के जिला परियोजना समन्वयक विवेक कुमार मौर्य ने बताया कि प्रथम चरण में 127 लाख रुपए के कार्य कराए गए। द्वितीय चरण में 330 लाख रुपए का लक्ष्य ह,ै जिसमें से 101 लाख रुपए मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए एजेंसी नामित की गई है जो की बायोसर्ट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड है तथा जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण के लिए दो एजेंसियां नामित की गई है जिनमें से एपाँफ आर्गेनिक एजेंसी महाराष्ट्र तथा दूसरी एजेंसी ट्रेस एसोर ग्लोबल सर्टिफिकेशन एजेंसी हैं। उन्होंने बताया कि गंगा किनारे के 5 से 7 किलोमीटर के दायरे के ग्रामों के इच्छुक कृषकों को जैविक खेती के माध्यम से 20-20 हेक्टेयर क्षेत्रफल के 100 क्लस्टर बनाकर जोड़ा जा रहा है। इससे हजारों किसानों को लाभ मिलेगा। इस अवसर पर अधिकारी और संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

ReferralCodeLLVR11
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-06-13at1242061
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2025-06-11at40003PM
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-10-20at41111PM1
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-04-17at53854PM4
previous arrow
next arrow
Home
Live TV
VIDEO NEWS
Verified by MonsterInsights