राजीव गांधी को याद कर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह ने 47वी बार रक्तदान किया

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बदायूँ। जिला व शहर कांग्रेस कमेटी के सयुक्त नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि को बलिदान दिवस के रूप में बनाया इस अवसर पर कांग्रेसियों ने जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष ओमकार सिंह व शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष असरार अहमद के नेतृत्व में परशुराम चौक स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय पर गोष्ठी कर राजीव गांधी की जीवनी पर प्रकाश डाला उसके उपरांत जिला अस्पताल में मरीजों को फल वितरण कर ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जिसमे जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष ओमकार सिंह ने 47वी बार रक्तदान किया तथा कांग्रेसियों ने जरूरतमंदों की जरूरत पर रक्तदान हेतु पंजीकरण कराया इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष ओमकार सिंह ने कहा आज किसी से पूछो कि वोट डालने के लिए अनिवार्य उम्र सीमा क्या है तो वह आसानी से बता देगा कि 18 साल. लेकिन पहले ऐसा नहीं था. राजीव गांधी के जमाने में वोट डालने के लिए उम्र सीमा 21 साल थी. राजीव गांधी ने ही वोटिंग के लिए 21 साल की उम्र घटाकर 18 करने का फैसला किया था. उनके इस फैसले से 5 करोड़ नए युवा वोटर्स बने थे. हालांकि उस दौरान राजीव गांधी के इस फैसले का बहुत विरोध हुआ था लेकिन आज की बात करें तो उनका ये फैसला सही लगता है क्योंकि 18 साल की उम्र के भारतीय नागरिक को अपना नेता चुनने की आजादी है. उन्होंने कहा यह राजीव गांधी ही थे,

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जिन्होंने भारत में दूरसंचार क्रांति लाई.आज जिस डिजिटल इंडिया की चर्चा है, उसकी संकल्पना राजीव गांधी अपने जमाने में कर चुके थे. उन्हें डिजिटल इंडिया का आर्किटेक्ट और सूचना तकनीक और दूरसंचार क्रांति का जनक कहा जाता है. राजीव गांधी की पहल पर अगस्त 1984 में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क की स्थापना के लिए सेंटर पार डिवेलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स की स्थापना हुई. इस पहल से शहर से लेकर गांवों तक दूरसंचार का जाल बिछना शुरू हुआ. जगह-जगह पीसीओ खुलने लगे. जिससे गांव की जनता भी संचार के मामले में देश-दुनिया से जुड़ सकी. फिर 1986 में राजीव की पहल से ही एमटीएनएल की स्थापना हुई, जिससे दूरसंचार क्षेत्र में और प्रगति हुई ओमकार सिंह ने राजीव गांधी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए आगे कहा कि देश में पहले कंप्यूटर आम जन की पहुंच से दूर थे. मगर राजीव गांधी ने अपने वैज्ञानिक मित्र सैम पित्रोदा के साथ मिलकर देश में कंप्यूटर क्रांति लाने की दिशा में काम किया. राजीव गांधी का मानना था कि विज्ञान और तकनीक की मदद के बिना उद्योगों का विकास नहीं हो सकता.उन्होंने कंप्यूटर तक आम जन की पहुंच को आसान बनाने के लिए कंप्यूटर उपकरणों पर आयात शुल्क घटना की पहल की. भारतीय रेलवे में टिकट जारी होने की कंप्यूटरीकृत व्यवस्था भी इन्हीं पहलों की देन रही. हालांकि राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने से पहले 1970 में देश में पब्लिक सेक्टर में कंप्यूटर डिविजन शुरू करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स की शुरुआत हो गई थी. 1978 तक आईबीएम पहली कंपनी थी, बाद में दूसरी प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों ने कंप्यूटर निर्माण शुरू किया जबकि आज मोदी जी अपनी सभाओं में इन योजनाओं के नाम बदलते हुए अपना नाम करने की कोशिश करते है और कहते है कांग्रेस ने 70 साल में क्या किया इस अवसर पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष असरार अहमद ने कहा कि पंचायतीराज से जुड़ी संस्थाएं मजबूती से विकास कार्य कर सकें, इस सोच के साथ राजीव गांधी ने देश में पंचायतीराज व्यवस्था को सशक्त किया. राजीव गांधी का मानना था कि जब तक पंचायती राज व्यवस्था सबल नहीं होगी, तब तक निचले स्तर तक लोकतंत्र नहीं पहुंच सकता. उन्होंने अपने कार्यकाल में पंचायतीराज व्यवस्था का पूरा प्रस्ताव तैयार कराया. 21 मई 1991 को हुई हत्या के एक साल बाद राजीव गांधी की सोच को तब साकार किया गया, जब 1992 में 73 वें और 74 वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायतीराज व्यवस्था का उदय हुआ. राजीव गांधी की सरकार की ओर से तैयार 64 वें संविधान संशोधन विधेयक के आधार पर नरसिम्हा राव सरकार ने 73 वां संविधान संशोधन विधेयक पारित कराया. 24 अप्रैल 1993 से पूरे देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू हुई. जिससे सभी राज्यों को पंचायतों के चुनाव कराने को मजबूर होना पड़ा. पंचायतीराज व्यवस्था का मकसद सत्ता का विकेंद्रीकरण रहा. उन्होंने कहा मौजूदा समय देश में खुले 551 नवोदय विद्यालयों में 1.80 लाख से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. गांवों के बच्चों को भी उत्कृष्ट शिक्षा मिले, इस सोच के साथ राजीव गांधी ने जवाहर नवोदय विद्यालयों की नींव डाली थी. ये आवासीय विद्यालय होते हैं. प्रवेश परीक्षा में सफल मेधावी बच्चों को इन स्कूलों में प्रवेश मिलता है.

बच्चों को छह से 12 वीं तक की मुफ्त शिक्षा और हॉस्टल में रहने की सुविधा मिलती है. राजीव गांधी ने शिक्षा क्षेत्र में भी क्रांतिकारी उपाय किए. उनकी सरकार ने 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति(NPE) की घोषणा की.इसके तहत पूरे देश में उच्च शिक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण और विस्तार हुआ. इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष वीरेश तोमर व जिलाउपाध्यक्ष गौरव सिंह ने कहा राजीव गांधी की नीतियों का विरोध करने वाले आज कहते है कांग्रेस ने 70 साल में क्या किया और उनके कार्यों के नाम बदल कर अपनी वाहवाही करने की कोशिश करते है राजीव गांधी की दूरदर्शी सोच ही आज युवाओ के हाथों में कम्प्यूटर और लैपटॉप डिजिटल इंडिया जैसी चीजें मिल सकी है इस अवसर पर संचालन सुरेश सिंह राठौर ने किया रजिस्ट्रेशन करवाने वालो में ओमकार सिंह, असरार अहमद, वीरेश तोमर, गौरव राठौर, अकील अहमद, इगलास अहमद, शशांक राठौर, सलीम अहमद, शफी अहमद, बाबू चौधरी, रफत अली खान सूरी मौजूद रहे।

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