शिव पार्वती विवाह की कथा सुन भाव विभोर हुए कथा श्रोता

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चित्रकूट। परमहंस संत रणछोड़ दास जी महाराज के कर कमलो से जानकीकुंड में स्थापित श्री रघुवीर मंदिर ट्रस्ट बड़ी गुफा में अरविंद भाई मफत लाल की जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रही नौ दिवसीय कथा में मिथिला धाम से पधारे परम पूज्य श्री किशोरी शरण मधुकर महाराज(मुढिया बाबा सरकार) राम कथा का गान कर रहे है महाराज जी कथा के तीसरे दिन सर्वप्रथम श्री सदगुरू सेवा संस्थान के अध्यक्ष विषद भाई मफत लाल की धर्म पत्नी श्रीमती रूपल बहन ने रामकथा पोथी और महाराज का पूजन अर्चन किया तत्पश्चात किशोरी जी महाराज अपनी अमृतमय वाणी से देश के कोने कोने से आए कथा श्रोताओं को शिव पार्वती विवाह की कथा सुनाते हुए बताया कि सती का द्वातीय जन्म राजा हिमांचल के यहां पार्वती के रूप में हुआ और जैसे ही ये खबर नारद जी को मिलती है नारद जी तुरंत राजा हिमांचल के यहां पहुंच जाते है नारद जी जैसे ही राजा हिमांचल के यहां पहुंचते है तुरंत राज हिमाचल आसान बैठाते है और उनके चरण पखारते है।

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इसके बाद नारद जी हिमाचल की पुत्री पार्वती के हाथों की रेखा देखते है और राजा हिमांचल से कहते है कि ये आपकी बेटी सुंदर सुशील है और नारद जी न उनका नामकरण किया और उमा,अंबिका,पार्वती नाम रखते है और बताते है कि इनमे शिव के गुण दिखते है इनको तप करना पड़ेगा तभी शिव इन्हे पति रूप में प्राप्त होगे ये सुनते ही राजा हिमांच और माता सुनैना को तो दुख होता है पर पार्वती खुश होती है और बोलती है कि आज से ही मै शिव को पति रूप में पाने के लिए तप करूंगी। महराज ने बताया कि एक बार भगवान शिव ने सप्त ऋषियों को पार्वती की परीक्षा लेने के लिए भेजा तो ऋषियों ने पार्वती से कहा कि हम आपको इनसे अच्छा वर खोज देगे तो पार्वती ने कहा कि मेरे गुरु महराज शिव जो को पति रूप में पाने के लिए बता गए है तो अब आप लोग कहा चक्कर में पड़े है अब तो मैं पति रूप में भगवान शिव को ही वरण करूंगी वही मेरे पति होगे।इतना सुनते ही लगन पत्रिका सजाई गई है और राजा हिमाचल के यहा भेजी गई और विवाह की तैयारी शुरू हो गई और शिव पार्वती का विवाह संपन्न हुआ और इन्ही से दो पुत्र कार्तिकेय और गणेश पैदा हुए शिव पार्वती विवाह की कथा सुन सभी श्रोता भाव विभोर हो गए।इस मौके पर चित्रकूट के तमाम साधु संत, आम जनमानस, तमाम प्रांतों से पधारे गुरु भाई बहन एवं सदगुरू परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

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