अमरज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के निवेशकों से दावे दाखिल करने की अपील, कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू
बदायूं। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), इलाहाबाद पीठ के आदेश के बाद अमरज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के विरुद्ध शुरू की गई कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के तहत शनिवार को इलाहाबाद से अधिवक्ता एवं अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) वीणु ड्राल अपनी टीम के साथ जिला बार एसोसिएशन, बदायूं पहुंचे। यहां उन्होंने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में उपस्थित अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर दिवाला समाधान प्रक्रिया की जानकारी दी तथा सहयोग का अनुरोध किया।
आईआरपी वीणु ड्राल ने बताया कि एनसीएलटी, इलाहाबाद पीठ ने 23 जुलाई 2026 को पारित आदेश के तहत अमरज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के विरुद्ध कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया प्रारंभ की है। इसके तहत कंपनी की परिसंपत्तियों का संरक्षण, वित्तीय स्थिति का आकलन, वैध दावों का सत्यापन तथा कानून के अनुरूप समाधान प्रक्रिया संचालित की जा रही है।
बैठक में बताया गया कि बदायूं के अनेक अधिवक्ताओं एवं अन्य लोगों द्वारा कंपनी में धनराशि जमा या निवेश किए जाने की जानकारी मिली है। ऐसे सभी निवेशकों एवं जमा धारकों से निर्धारित फॉर्म-सीए (Form-CA) के माध्यम से अपना व्यक्तिगत दावा प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक दावेदार को अपने नाम से अलग-अलग दावा करना होगा तथा उसके साथ जमा रसीद, प्रमाण-पत्र, बैंक स्टेटमेंट, भुगतान का विवरण, पत्राचार और अन्य संबंधित दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा।
आईआरपी ने कहा कि दावा प्रपत्र एवं सहायक दस्तावेजों को व्यवस्थित रूप से प्राप्त करने के लिए गूगल फॉर्म उपलब्ध कराया गया है, लेकिन यह वैधानिक दावा प्रपत्र का विकल्प नहीं है। गूगल फॉर्म के माध्यम से भेजे गए सभी दावे और दस्तावेज सत्यापन के बाद ही स्वीकार या अस्वीकार किए जाएंगे।बैठक में बार एसोसिएशन से यह भी अनुरोध किया गया कि वह सार्वजनिक घोषणा, फॉर्म-सीए और दावा प्रक्रिया की जानकारी अधिक से अधिक अधिवक्ताओं एवं निवेशकों तक पहुंचाए। साथ ही कंपनी की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश, दस्तावेजों, संदिग्ध लेन-देन, धनराशि के हस्तांतरण, अधिकारियों एवं निदेशकों के संबंध में यदि किसी के पास कोई सत्यापन योग्य जानकारी हो तो उसे अंतरिम समाधान पेशेवर को उपलब्ध कराया जाए। कंपनी से जुड़े लंबित न्यायिक मामलों, वसूली प्रकरणों, आपराधिक मुकदमों, उपभोक्ता मामलों एवं अन्य कानूनी कार्यवाहियों की जानकारी साझा करने की भी अपील की गई।वीणु ड्राल ने स्पष्ट किया कि बार एसोसिएशन अथवा कोई भी प्रतिनिधि दावों को प्राप्त करने, सत्यापित करने, स्वीकार करने अथवा सामूहिक रूप से प्रस्तुत करने का अधिकार नहीं रखता। प्रत्येक निवेशक या दावेदार को अपना दावा निर्धारित प्रारूप में व्यक्तिगत रूप से अंतरिम समाधान पेशेवर के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य कंपनी की परिसंपत्तियों की पहचान एवं संरक्षण करना, वैध दावों का परीक्षण करना तथा कानून के अनुसार वसूली एवं वितरण की संभावना को अधिकतम करना है। किसी भी दावेदार को धनवापसी का कोई आश्वासन या गारंटी नहीं दी जा रही है। सत्य एवं समय पर उपलब्ध कराई गई प्रत्येक जानकारी कंपनी की परिसंपत्तियों का पता लगाने तथा सभी हितधारकों के हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
बैठक के अंत में आईआरपी ने बार एसोसिएशन एवं सभी अधिवक्ताओं से दिवाला समाधान प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग देने की अपील करते हुए कहा कि सभी दावेदार निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए समय पर अपने दावे एवं आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें, ताकि दावों का परीक्षण कानून के अनुसार शीघ्रता से किया जा सके।















































































