यूपी में 4652 बसों के चक्के जाम, पूरी तरह चरमराई परिवहन व्यवस्था, चौराहों पर जमा हुए लोग

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लखनऊ। नए साल का पहले दिन राजधानी की यातायात व्यवस्था ठप हो गई। हिट एंड रन कानून के विरोध में ड्राइवरों ने हड़ताल कर दी। पूरे प्रदेश में 4652 बसों के चक्के जाम रहे। महज 852 बसों का संचालन हुआ। इससे पूरे प्रदेश की परिवहन व्यवस्था गड़बड़ा गई। हर चौराहे पर लोगों की भीड़ जमा हुई। निजी वाहनों के इसमें चांदी हो गई। उन्होंने मनचाहा किराया लेकर सवारियां ढोईं। यूपी की राजधानी लखनऊ में  900 बसों के पहिए पांच घंटे तक थमे रहे। रोडवेज के साथ अनुबंधित बसों से सफर करने वाले 62 हजार यात्री परेशान हुए। वहीं आटो व टेम्पो का संचालन भी ड्राइवरों ने बाधित किया, जिसके 10 हजार यात्री प्रभावित हुए। बसों की हड़ताल से शहर में यातायात जाम हो गया। ट्रांसपोर्टनगर और अमौसी में कामर्शियल वाहन खड़े होने से जरूरी सामानों की सप्लाई चेन टूट गई। उदयगंज निवासी अमित सिंह अपनी फैमिली के साथ सीतापुर जाने के लिए कैसरबाग बस अड्डे पहुंचे। उनकी पत्नी व बेटियां साथ थीं। उन्होंने सीतापुर की बस में सवार होने का प्रयास किया, पर ड्राइवरों ने उन्हें बस में सवार नहीं होने दिया। ऐसे हजारों पैसेंजर सोमवार को कैसरबाग, चारबाग, आलमबाग, अवध बस अड्डे पहुंचे, पर उन्हें सफर की सुविधा नहीं मिल सकी। बस ड्राइवरों की हड़ताल के चलते बसों के चक्के जाम कर दिए गए। बसें जहां की तहां खड़ी रहीं। सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक, पांच घंटे संचालन पूरी तरह से ठप रहा। हालांकि, रोडवेज अफसर दिनभर बस संचालन का प्रयास करते रहे, पर उन्हें दोपहर बाद सफलता मिली। लखनऊ परिक्षेत्र में रोडवेज व अनुबंधित बसों की संख्या 992 है। ड्राइवरों ने हड़ताल कर 900 बसों को सड़कों पर निकलने से रोक दिया। जबकि अफसरों ने मशक्कत कर 92 बसों को चलाने में सफलता हासिल की। हालांकि, इस दौरान अफसरों से ड्राइवरों की कहासुनी भी हुई। बसों से प्रतिदिन 72 हजार पैसेंजर यात्रा करते हैं, जिसमें 62 हजार यात्री सफर से वंचित हो गए। रोडवेज अफसरों ने बताया कि गत 31 दिसंबर को अमौसी ऑयल डिपों के टैंकर चालकों ने नए कानून के विरोध में तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की। इसकी चिट्ठी सोमवार सुबह वायरल हो गई। देखते ही देखते रोडवेज व अनुबंधित बसों के ड्राइवरों ने हड़ताल कर दी और शहर का यातायात ठप हो गया। अचानक हुई हड़ताल से आम यात्रियों से लेकर मरीज, अफसर, कर्मचारी, हर आय, आयुवर्ग का पैसेंजर प्रभावित हुआ। सुबह से दोपहर तक बसों की हड़ताल के चलते यात्रियों का सफर मुहाल हो गया। ऐसे में आटो, टेम्पो, ई रिक्शा चालकों ने यात्रियों की सहूलियत के लिए सुविधाएं दीं। पर, ड्राइवरों ने उन्हें धमकाया। राजधानी में 45 सौ आटो, टेम्पो आदि हैं, जिसके करीब 10 हजार यात्रियों को बस ड्राइवरों की मनमानी के चलते सफर मयस्सर नहीं हो सका।

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