विभागों से समन्वय स्थापित कर कार्य योजना एक माह के अन्दर की जाए तैयार : डीएम

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बदायूँ। जिलाधिकारी मनोज कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभाकक्ष में डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिव डेवलपमेन्ट कमेटी (डी०सी०डी०सी०) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता ने बताया कि सरकार द्वारा नये सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया है। नये मंत्रालय के गठन के उपरान्त सहकार से समृद्धि की ओर के कम में सहकारिता आन्दोलन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। जिसके अन्तर्गत कार्यरत समितियों का पुनरूद्धार करना, नयी समितियां बनाना आदि। वर्तमान में जनपद बदायूँ में 1037 ग्राम पंचायते हैं जिनमें 132 सहकारी समितियां, 281 दुग्ध समितियां तथा 03 मत्स्य समितियां है। जनपद में 1037 के सापेक्ष 416 समितियां कार्यरत हैं। जनपद में 132 सहकारी समितियां हैं जिसमें से मात्र 03 सहकारी समितियां ही क्रमिक लाभ पर हैं शेष 129 समितियां हानि में है। नये मंत्रालय के गठन के उपरान्त सहकारी समितियों की उपविधियां संशोधित हुयी हैं। जिनको अब 132 बी-पैक्स का नाम दिया गया है। समितियां अब कुछ भी कार्य करने में स्वतन्त्र हैं तथा अपने क्षेत्र से बाहर जाकर भी कार्य कर सकती हैं। डीएम ने निर्देश दिए कि ग्राम पंचायतों में जहाँ किसी विभाग की कोई सहकारी समिति गठित नही है उन ग्राम पंचायतो में सहकारिता विभाग की बहुउदेशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति व मत्स्य विभाग की मत्स्य समितियाँ एवं दुग्ध विभाग की दुग्ध समितियों का चिन्हाकन करते हुये विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित कर कार्य योजना एक माह के अन्दर तैयार की जाए। सहायक निदेशक मत्स्य द्वारा अवगत कराया गया कि मत्स्य सहकारी समितियों के गठन हेतु तय मानक के अनुसार 02 न्याय पंचायतों में 21 हैक्टेयर भूमि की आवश्यकता होती है। उनके द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि विकास खण्ड कादरचौक, सालारपुर एवं समरेर में तत्संबंधी डाटा कलैक्शन किया जा रहा है। जिलाधिकारी द्वारा इस संबंध में उनको निर्देश दिये गये कि प्रत्येक तहसील से नवीन मत्स्य सहकारी समितियों के गठन हेतु डाटा कलैक्शन कराना सुनिश्चित करें। इसी प्रकार जनरल मैनेजर जिला दुग्ध संघ द्वारा प्रस्ताव रखा गया कि यदि ग्राम पंचायतों से भूमि का आबंटन हो सके तो रिक्त ग्राम सभा में नये दुग्ध संघ स्थापित किये जा सकते हैं। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिला पंचायत राज अधिकारी से समन्वय स्थापित करते हुये कार्योजना के अनुसार कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। उन्होने जनपद स्तर पर दुग्ध संघ स्थापित करने हेतु निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुये कार्यवाही करने के निर्देश दिए। ग्राम पंचायत/ग्राम सभा स्तर पर नई प्राथमिक सहकारी समितियों के पंजीकरण हेतु आवश्यक प्रक्रिया अपनाते हुये नई सहकारी समिति के पंजीकरण की कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाए। जिन ग्राम सभा में कार्यालय एवं गोदाम हेतु भूमि की आवश्यकता हो तो ग्राम सभा की भूमि समिति को आबंटन कराने हेतु उसका प्रस्ताव तैयार कर राजस्व विभाग से समन्वय स्थापित करते हुये आवश्यक कार्यवाही अमल में लायी जाए। भारत सरकार/राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ सहकारी समितियों को दिलायें जाने हेतु आपसी सामंजस्य स्थापित करें, जिससे सम्बन्धित समितियाँ जीवंत एवं आर्थिक रूप से सशक्त हो सके। आवश्यकता पडने पर अन्य विभागों का भी सहयोग प्रदान किया जा सकता है। समितियों के गोदामों की रोड कनैक्टीविटी हेतु पंचायत विभाग से समन्वय स्थापित किया जाए। समितियों के बाउन्ड्रीबाल एवं गोदामों की मरम्मत हेतु मिशन कायाकल्प के माध्यम से समितियों का बुनयादी ढाँचा मजबूत किया जाये। सहकारी समितियों पर विशेष सदस्यता अभियान चलाकर नये सदस्य बनाये जाए।

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