पति आलोक के पिता बोले- अब किसी बहू को नहीं पढ़ाऊंगा

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आजमगढ़। पीसीएस अधिकारी ज्योति मौर्य और उनके पति आलोक मौर्य का प्रकरण इन दिनों सुर्खियों में है। जिसे देखो वो इसी मुद्दे पर बात कर रहा है। इस प्रकरण में आजमगढ़ जिला के बछवल गांव का नाम भी शामिल हो गया है। क्योंकि ज्योति मौर्य का ससुराल बछवल गांव में है। ज्योति के ससुर व आलोक के पिता राम मुरारी मौर्य का कहना है कि मेरी बहू को कम से कम बच्चों का ख्याल करना चाहिए। इस प्रकरण के बाद वह अब किसी बहू को पढ़ाने की हिम्मत नहीं करेंगे। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल शादी के कार्ड के बारे में राम मुरारी मौर्य ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि जिस कार्ड को दिखाकर ज्योति के पिता आरोप लगा रहे हैं उसे उन्होंने ही छपवाया था। मैंने या आलोक ने शादी का कार्ड नहीं छपवाया था। दरअसल ज्योति के पिता का कहना है कि आलोक ने झूठ बोलकर उनकी बेटी से शादी की। उन्होंने शादी का कार्ड दिखाते हुए कहा कि आलोक ने खुद को पंचायत अधिकारी बता शादी के कार्ड में भी ऐसा ही लिखवाया था। ज्योति और आलोक की शादी का कार्ड सोशल मीडिया पर भी वायरल है। इस शादी के कार्ड के मुताबिक आलोक के नाम के आगे ग्राम पंचायत अधिकारी लिखा है, जबकि अब आलोक खुद को सफाई कर्मचारी बताते हुए ज्योति को पढ़ा लिखा कर पीसीएस अधिकारी बनाने का दावा कर रहे हैं। ज्योति मौर्य के पति आलोक मौर्य आजमगढ़ जिले के बछवल गांव के रहने वाले हैं। वर्तमान में वह प्रयागराज में रहते हैं लेकिन उनके पिता राम मुरारी मौर्य गांव में ही रहते हैं। 2010 में आलोक मौर्य की शादी वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र के चिरईगांव निवासी ज्योति मौर्य से हुई थी। शादी के बाद रिश्ते कई वर्षों तक अच्छे रहे। मेहनत और लगन से पढ़ाई करने के बाद ज्योति का चयन शिक्षक के पद पर हुआ, लेकिन ज्योति का पीसीएस अधिकारी बनने का सपना पाले हुए थी। इस सपने को उन्होंने 2016 में पूरा किया। कई सालों तक दोनों के रिश्ते ठीक से चलते रहे। लेकिन विगत दिनों ज्योति मौर्य के पति आलोक मौर्य द्वारा उस पर लगाए गए आरोप के बाद दोनों की मीडिया और सोशल साइट्स पर चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। इस संबंध में जब आलोक के पिता मुरारी मौर्या और ग्रामीणों से बात की गई तो सभी ने इस विवाद की निंदा की। आलोक के पिता ने व्यथित मन से कहा कि जब बहू ज्योति ने पीसीएस की परीक्षा पास की थी तो सीना गर्व से चौड़ा हो गया था। सोचा था कि सभी बहुओं को पढ़ा-लिखाकर जिम्मेदार बनाऊंगा, लेकिन ज्योति ने सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि ज्योति का यह फैसला बहुत ही गलत है। उसके दो बच्चे हैं। उसे कम से कम उनके भविष्य के बारे में सोचकर फैसला लेना चाहिए। वहीं ग्रामीणों ने कहा कि आलोक और उनके पिता ने बड़ी मेहनत से ज्योति को यहां तक पहुंचाया है। अगर यह लोग नहीं होते तो ज्योति यहां तक नहीं पहुंच पाती और ना ही अपने सपने को पूरा कर पाती। आलोक मौर्य भले ही प्रयागराज में रहता है, लेकिन उसके पिता राम मुरारी मौर्य आज भी गांव में ही रहते हैं। लगातार सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर आ रही खबरों से वह काफी व्यथित हैं। वह हार्ट के मरीज भी हैं। गुरुवार को दिन भर उनके घर मीडिया का आना-जाना लगा रहा। तनाव में आकर राम मुरारी मौर्य घर छोड़कर कहीं चले गए। देर शाम वापस घर लौटे।

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